UP: कफ सिरफ...लखनऊ जेल में बंद अमित टाटा, अमित यादव को वारंट बी पर लाएगी पुलिस; कोर्ट ने 31 मार्च को तलब किया
Cough Syrup: कफ सिरप प्रकरण में अमित सिंह 'टाटा' और अमित यादव को को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में सरगना शुभम जायसवाल की खोजबीन की जा रही है।
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Varanasi News: कोडीन युक्त कफ सिरप की बरामदगी और तस्करी के मामले में लखनऊ जेल में बंद दो आरोपियों, अमित सिंह टाटा और अमित यादव को कोतवाली पुलिस वारंट बी पर कोर्ट में पेश कराएगी। इस संबंध में पुलिस ने जिला जज एफटीसी (14वां वित्त आयोग) मनोज कुमार की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। अदालत ने अभियोजन की दलीलें सुनने के बाद वारंट बी जारी करते हुए दोनों आरोपियों को 31 मार्च को अदालत में तलब किया है।
एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह ने बताया कि जेल में बंद अमित सिंह टाटा और अमित यादव की संलिप्तता सामने आई है। दोनों आरोपियों को एसटीएफ ने अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था और वर्तमान में वे लखनऊ जेल में बंद हैं। ऐसे में उनसे पूछताछ और रिमांड की प्रक्रिया के लिए वारंट बी जारी करना आवश्यक था।
पुलिस का कहना है कि कफ सिरप की अवैध बिक्री और तस्करी से जुड़े इस मामले की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। पूछताछ से तस्करी के नेटवर्क, सप्लाई चेन और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
पुलिस ने की थी कार्रवाई
इस मामले में एसटीएफ की लखनऊ टीम ने मैदागिन निवासी अमित यादव को हरहुआ रिंग रोड स्थित काशीधाम के पास से गिरफ्तार किया था। वह समाजवादी युवजन सभा का प्रदेश सचिव और हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज का पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष भी रह चुका है।
एसटीएफ के मुताबिक, वह कफ सिरप तस्करी गिरोह के मुख्य सरगना शुभम जायसवाल का करीबी सहयोगी था और बंगाल व बांग्लादेश तक सप्लाई के नेटवर्क से जुड़ा था। अमित ने वाराणसी के सप्तसागर दवा मंडी स्थित अपनी फर्म जीएल सर्जिकल के माध्यम से कफ सिरप की एक लाख से अधिक शीशियां खरीदी थीं और इन्हें अन्य फर्मों के नाम पर फर्जी बिक्री दिखाकर ऊंचे दाम पर बेच दिया गया।
वहीं, अमित सिंह टाटा को लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से एक फॉर्च्यूनर वाहन, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद हुए थे। पूछताछ में सामने आया कि वह शुभम जायसवाल के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल तक कफ सिरप की तस्करी में शामिल था। पुलिस का मानना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद इस अवैध नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।