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कोरोना के फेर में पढ़ाई का नुकसान: बच्चों के लिखने और समझने की क्षमता में आई कमी, भरपाई बड़ी चुनौती

Wed, 23 Mar 2022 10:51 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 23 Mar 2022 10:51 AM IST
सार

वाराणसी जिले में परिषदीय से लेकर इंटर कॉलेज स्तर के विद्यालयों को कोरोना की वजह से बंद रखा गया था। अब दो साल बाद मामले कम होने पर ऑफलाइन कक्षाएं शुरू हुई हैं, लेकिन सीखने की प्रक्रिया में जो गैप आया है, उसे भरना बड़ी चुनौती है। 

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Coronavirus bad impact on school education decrease in ability of children to write and understand now  big challenge to compensate
वाराणसी के स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं शुरू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना महामारी के दौरान दो साल में सबसे अधिक नुकसान छात्रों की पढ़ाई को हुआ है। यूपी बोर्ड से लेकर सीबीएसई तक के विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गई थी, लेकिन छात्र-छात्राओं की उपस्थित पूरी नहीं हो पा रही थी। इसके पीछे स्मार्ट फोन की कमी और इंटरनेट नेटवर्किंग में समस्या रही। कई लोगों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। लोगों ने मजबूरी वश बच्चों को विद्यालय से निकाल लिया। 

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वाराणसी जिले में परिषदीय से लेकर इंटर कॉलेज स्तर के विद्यालयों को कोरोना की वजह से बंद रखा गया था। मार्च 2020 में बंद होने के बाद अक्तूबर 2020 में जब संक्रमण कम हुआ तो इंटर कॉलेज खुले, लेकिन मार्च 2021 में संक्रमण बढ़ने पर ऑफलाइन कक्षाएं बंद हो गईं।

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ऑफलाइन कक्षाओं की तुलना में ऑनलाइन में उपस्थिति बहुत कम

हालांकि कुछ विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए शिक्षकों को बुलाया जा रहा था। ऑफलाइन कक्षाओं की तुलना में ऑनलाइन में उपस्थिति बहुत कम रही। अब दो साल बाद मामले कम होने पर ऑफलाइन कक्षाएं शुरू हुई हैं, लेकिन सीखने की प्रक्रिया में जो गैप आया है, उसे भरना बड़ी चुनौती है। 

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डिजिटल लर्निंग पर रहा जोर

लॉकडाउन के कारण सारे शैक्षणिक संस्थानों को बंद करना पड़ा, इससे शिक्षण-प्रक्रिया बाधित हुई। ज्ञान के निर्बाध प्रसार को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक समस्त शैक्षणिक संस्थानों को वैकल्पिक शैक्षणिक ऑनलाइन अधिगम अपनाना पड़ा है। इसमें डिजिटल लर्निंग, ई-लर्निंग ने अहम भूमिका निभाई।

मोबाइल से पढ़ाई कम, गेम खेलते रहे बच्चे 
पढ़ाई बाधित न हो इसलिए घरों में ही ऑनलाइन पढ़ाई का काम शुरू किया गया, लेकिन यह कारगर नहीं हुआ। बच्चे पढ़ाई कम और मोबाइल में गेम खेलने को अधिक प्राथमिकता देते रहे। लंबे समय तक स्कूल बंद होने के चलते बच्चों को भौतिक पठन-पाठन से नहीं जोड़ा जा सक ा, जिसकी वजह से उनकी समझने और लिखने की क्षमता में कमी आई है।  

सुविधाओं का भी अभाव
सुविधाओं के अभाव में कई बच्चे पढ़ाई से वंचित रह गए। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चों के पास स्मार्टफोन न होने से काफी दिक्कतें हुईं। कुछ परिवार तो ऐसे भी रहे, जिनके पास जो रोजगार था, वह भी छूट गया। घर का खर्च चलाने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई बड़ी चुनौती थी। कुछ घर तो ऐसे भी रहे, जहां केवल एक ही स्मार्ट फोन थे, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही थी। 

अब पटरी पर लौट रही व्यवस्था

निवेदिता शिक्षा सदन इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. आनंद प्रभा सिंह ने कहा कि कोरोना काल में विद्यालय बंद रहे, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई जारी रही। यह बात सही है कि ऑनलाइन कक्षा में उपस्थिति कम रही। कई घर ऐसे भी रहे, जहां स्मार्टफोन एक ही था। इस वजह से बच्चे नहीं जुड़ पाए। अभिभावकों के मोबाइल पर ऑनलाइन क्लास का वीडियो भी भेजा गया, ताकि छात्रों को परेशानी न हो। अब धीरे धीरे संख्या बढ़ रही है।
 
सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विश्वनाथ दूबे ने कहा कि दो साल में निश्चित ही पूरी पढ़ाई ऑनलाइन व्यवस्था पर निर्भर रही। ऐसे बच्चे जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं थे या फिर किसी कारण से वह ऑनलाइन नहीं जुड़ सके, उन्हें फोन कर विषयवार जानकारी दी गई। ऑफलाइन कक्षा का कोई विकल्प नहीं है, इससे बच्चों में सीखने और समझने की क्षमता का अधिक विकास होता है। अब व्यवस्था पटरी पर लौट रही है। 

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