कोरोना: टीएमपीआरएसएस 2 से खतरा ज्यादा, कोविड 19 की गंभीरता बताने वाले दो जीन म्यूटेशन पर बीएचयू में हुआ शोध
बीएचयू प्राणी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के निर्देशन में हुए अध्ययन में पाया गया है कि टीएमपीआरएसएस2 जीन भारतीय आबादी के बीच कोविड-19 गंभीरता के लिए जिम्मेदार है।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों ने देश में कोविड 19 की गंभीरता बताने वाले दो जीन म्यूटेशन पर शोध किया है। प्राणी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के निर्देशन में एसीई-2 और टीएमपीआरएसएस 2 पर शोध में पता चला है कि एसीई-2 कोरोना संक्रमण के लिए कम गंभीर है। जबकि टीएमपीआरएसएस2 कोविड 19 को बढ़ावा दे रहा है।
प्रोफेसर ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को संक्रमित करने के लिए मानव के दो जीन (एसीई-2 और टीएमपीआरएसएस2) पर कोरोना वायरस निर्भर रहता है। दोनों जीन में म्यूटेशन इस वायरस से होने वाले इंफेक्शन और मौतों के लिए जिम्मेदार होते हैं। दोनों जीन लोगों में परस्पर विरोधी का काम कर रहे हैं।
वैज्ञानिक रुद्र कुमार पांडे, अंशिका श्रीवास्तव और प्रज्ज्वल प्रताप सिंह शोध में शामिल रहे। प्रो. चौबे ने बताया कि टीम ने 393 वैश्विक सैंपल के नेक्स्ट-जनरेशन-सिक्वेंसिंग (एनजीयस) डेटा का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया है कि टीएमपीआरएसएस2 जीन भारतीय आबादी के बीच कोविड-19 गंभीरता के लिए जिम्मेदार है।
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इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
यह इस सप्ताह इंटरनेशनल जर्नल इंफेक्शन, जेनेटिक्स एंड इवॉल्यूशन में प्रकाशित हुआ है। रुद्र कुमार पांडेय ने बताया कि फाइलोजेनेटिक एनालिसिस के आधार पर देखा गया कि भारत के लोग इस जीन के लिए पश्चिमी यूरोपीय लोगों की तरह संवेदनशीलता दिखा रहे हैं, जो कि कोविड-19 से होने वाली मौतों को बढ़ा रहा है।
पिछले साल इसी टीम ने एसीई-2 जीन पर व्यापक विश्लेषण में एक म्यूटेशन रिपोर्ट किया था जो दक्षिण एशिया के लोगों को कोविड-19 से सुरक्षा प्रदान कर रहा था। बीएचयू के विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अनिल कुमार त्रिपाठी ने इस शोध के लिए बधाई दी है।