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दुनिया में भ्रम फैलाया गया कि लोगों को संस्कृत समझ नहीं आती

Sat, 15 Jan 2022 01:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 15 Jan 2022 01:18 AM IST
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Confusion was spread in the world that people do not understand Sanskrit.
पद्मभूषण पं. विद्यानिवास मिश्र की जयंती पर तीन दिवसीय वेबिनार का समापन शुक्रवार को हुआ। विद्याश्री न्यास एवं लाल बहादुर शास्त्री पीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में प्रमुख भारतीय भाषाएं समकालीन प्र्रवृत्तियां विषयक वेबिनार में देश भर से जुड़े विद्वानों ने विचार व्यक्त किए।
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मुख्य वक्ता प्रो. राधा बल्लभ त्रिपाठी ने कहा कि भारत की भाषाएं आपस में एक दूसरे को संपन्न बनाती हैं उनमें आपसी प्रतिस्पर्धा नहीं रही है। पूरी दुनिया में यह भ्रम फैलाया गया कि लोगों को संस्कृत समझ नहीं आती इसके कारण प्राकृत बोलचाल में प्रचलित हुई। सत्य ये है कि प्राचीनकाल से ही बहुभाषा को बढ़ावा देने का कार्य भारतीय मनीषियों ने किया था। मध्यकाल में रहीम ने अपने काव्य में फारसी और संस्कृत के शब्दों का इस्तेमाल किया था। विशिष्ट अतिथि प्रो. सूर्यप्रकाश दीक्षित ने कहा कि भाषा में बिना शोध अपनी रुचि से नवीन भाषा नहीं बनाई जा सकती है। अध्यक्षता कर प्रो. अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि औपनिवेशिक काल में अंग्रेजी भाषा के माध्यम से देश की भाषा और संस्कृति पर हमला किया गया। कंप्यूटर संस्कृत की भाषा को समझता है इससे ये साबित होता है कि भारतीय भाषाएं बहुत ही अधिक वैज्ञानिक हैं। संचालन डॉ. रामसुधार सिंह और स्वागत डॉ. दयानिधि मिश्र ने किया।
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शब्द को अर्थ ज्ञान आज देने दो...
वाराणसी। पद्मभूषण पं. विद्यानिवास मिश्र की जयंती पर विद्याश्री न्यास की ओर से ऑनलाइन काव्य संध्या का आयोजन किया गया। शुरुआत पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र ने शब्द को अर्थ ज्ञान आज देने दो...के साथ किया। इसके बाद विश्वनाथ सचदेव ने सूर्यास्त को हौले से धकियाने का सुख, दिन को कुछ और बड़ा करने का सुख...सुनाया। इस दौरान जितेंद्र नाथ मिश्र, शैलजा सिंह, अशोक घायल, अभिनव, नसीम निशां, सरोज पांडेय, इंद्र कुमार, वशिष्ठ अनूप, इंदीवर, पवन, वासुदेव ओबराय, धर्मेंद्र गुप्ता, सुरेंद्र वाजपेई, रविकेश मिश्र, अनंत मिश्र, विद्या बिंदु सिंह, वासुदेव ओबराय, मंजुला चतुर्वेदी ने काव्य पाठ किया। संचालन प्रकाश उदय ने किया। प्रो. उदयन, डॉ. संजय, डॉ. वंदना, डॉ. अमित, डॉ. इशरत, डॉ. गुलजबी, प्रो. सर्वेश, डॉ. रेनू राय, कमलेश, डॉ. अरविंद, अनुराग, यज्ञेश्वर मिश्र, राजेश कुमार तिवारी उपस्थित रहे। तकनीक सहयोग प्रतीक तिवारी, डॉ. अनुराधा राय और शशिशेखर ने किया। ब्यूरो
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