{"_id":"573b7bc74f1c1bc473ac724d","slug":"compensation-will-struggle-to-meet","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुआवजा मिलने तक करेंगे संघर्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुआवजा मिलने तक करेंगे संघर्ष
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 18 May 2016 01:45 AM IST
विज्ञापन
मुआवजे के लिए आवाज उठाते रिंग रोड के प्रभावित गांवों के किसान।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नए सर्किल रेट के आधार पर जब तक हमारी जमीन का पूरा मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष करते रहेंगे। पीछे नहीं हटेंगे। हृदयपुर और अहमदपुर में सत्याग्रह पर बैठे किसानों ने मंगलवार को अपनी मांगों के समर्थन में पुरजोर आवाज उठाई। कहा कि शासन-प्रशासन ने यदि उनके हक के खिलाफ कदम उठाया तो इसे कतई बरदाश्त नहीं किया जाएगा।
किसानों ने कहा कि प्रशासन उनके साथ मनमाना व्यवहार कर रहा है। पहले नाइंसाफी न होने देने की बात कही गई और फिर 54 लोगों पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। तमाम तरीके से दबाव बनाए जा रहे हैं लेकिन इन कार्रवाइयों से किसान डरने वाले नहीं हैं। बल्कि, उनका आत्म विश्वास मजबूत हुआ है। इस दौरान किसानों ने प्रशासन के विरोध में जमकर नारे लगाए। साथ ही, दोहराया कि रिंग रोड के लिए अधिगृहीत जमीन का पूरा मुआवजा लेकर रहेंगे। सभी गांव के किसान जिनकी जमीन रिंग रोड की जद में आई है, उन्हें समुचित मुआवजा मिलना ही चाहिए।
प्रशासन यदि यह सोच रहा है कि डरा-धमका कर किसानों की आवाज दबा दी जाएगी, तो यह नहीं होने पाएगा। किसान संघर्ष के लिए एकजुट हैं। सत्याग्रह का नेतृत्व महेंद्र प्रसाद ने किया। इस मौके पर मंगू श्रीवास्तव, मिठाई लाल पटेल, विजय पटेल, राजेंद्र मानव, अरविंद पटेल, रामबली सिंह, राम निहोर, सत्यदेव पटेल, रामहिंद पटेल, होरी लाल, सामा देवी, सज्जन देवी, प्रभावती देवी, अंजनी देवी समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।
विज्ञापन
वहीं, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत रिंग रोड के मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे किसानों के आंदोलन को धार देंगे। बुधवार को टिकैत इदिलपुर, अहमदपुर और हृदयपुर सत्याग्रह स्थलों पर जाएंगे और किसानों के हक की लड़ाई में उनका साथ देंगे। इस दौरान वह किसानों से मिलकर उनकी समस्याएं जानेंगे। टिकैत सारनाथ के विद्याश्रम परिसर में चल रहे राष्ट्रीय शिविर में शिरकत करने आए हैं।
मंगलवार को ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि किसानों को उनके हक के बारे में ज्यादा पता नहीं है। इसी का फायदा शासन, प्रशासन उठाता है। टिकैत ने कहा कि अगर शासन, प्रशासन को मुफ्त में जमीन मिल जाए तो वह उस पर कब्जा कर लेंगे और किसानों को कुछ नही देंगे। कहा कि जमीन के मामलों में आसानी से हक नहीं मिलता। अपना हक मांगना पड़ता है और जरूरत पड़ने पर छीनना पड़ता है। टिकैत ने कहा कि यहां के किसानों की जमीन कौड़ी के भाव ले ली गई और किस तरह से उनके घर तोड़ दिए गए और उन्हें रातोंरात बेघर कर दिया गया। कहा कि वह किसानों के साथ अन्याय नही होने देंगे। भाकियू उनके साथ खड़ा है।
विज्ञापन
किसानों ने कहा कि प्रशासन उनके साथ मनमाना व्यवहार कर रहा है। पहले नाइंसाफी न होने देने की बात कही गई और फिर 54 लोगों पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। तमाम तरीके से दबाव बनाए जा रहे हैं लेकिन इन कार्रवाइयों से किसान डरने वाले नहीं हैं। बल्कि, उनका आत्म विश्वास मजबूत हुआ है। इस दौरान किसानों ने प्रशासन के विरोध में जमकर नारे लगाए। साथ ही, दोहराया कि रिंग रोड के लिए अधिगृहीत जमीन का पूरा मुआवजा लेकर रहेंगे। सभी गांव के किसान जिनकी जमीन रिंग रोड की जद में आई है, उन्हें समुचित मुआवजा मिलना ही चाहिए।
विज्ञापन
प्रशासन यदि यह सोच रहा है कि डरा-धमका कर किसानों की आवाज दबा दी जाएगी, तो यह नहीं होने पाएगा। किसान संघर्ष के लिए एकजुट हैं। सत्याग्रह का नेतृत्व महेंद्र प्रसाद ने किया। इस मौके पर मंगू श्रीवास्तव, मिठाई लाल पटेल, विजय पटेल, राजेंद्र मानव, अरविंद पटेल, रामबली सिंह, राम निहोर, सत्यदेव पटेल, रामहिंद पटेल, होरी लाल, सामा देवी, सज्जन देवी, प्रभावती देवी, अंजनी देवी समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।
विज्ञापन
वहीं, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत रिंग रोड के मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे किसानों के आंदोलन को धार देंगे। बुधवार को टिकैत इदिलपुर, अहमदपुर और हृदयपुर सत्याग्रह स्थलों पर जाएंगे और किसानों के हक की लड़ाई में उनका साथ देंगे। इस दौरान वह किसानों से मिलकर उनकी समस्याएं जानेंगे। टिकैत सारनाथ के विद्याश्रम परिसर में चल रहे राष्ट्रीय शिविर में शिरकत करने आए हैं।
मंगलवार को ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि किसानों को उनके हक के बारे में ज्यादा पता नहीं है। इसी का फायदा शासन, प्रशासन उठाता है। टिकैत ने कहा कि अगर शासन, प्रशासन को मुफ्त में जमीन मिल जाए तो वह उस पर कब्जा कर लेंगे और किसानों को कुछ नही देंगे। कहा कि जमीन के मामलों में आसानी से हक नहीं मिलता। अपना हक मांगना पड़ता है और जरूरत पड़ने पर छीनना पड़ता है। टिकैत ने कहा कि यहां के किसानों की जमीन कौड़ी के भाव ले ली गई और किस तरह से उनके घर तोड़ दिए गए और उन्हें रातोंरात बेघर कर दिया गया। कहा कि वह किसानों के साथ अन्याय नही होने देंगे। भाकियू उनके साथ खड़ा है।