वाराणसी में कारोबार पर अब ‘आचार संहिता’ का झटका
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नोटबंदी के बाद अब कारोबार पर ‘चुनाव आचार संहिता’ का झटका लगा है। कैश लेकर चलने में व्यापारी भय खा रहे हैं। उनका आरोप है कि पुलिस चेकिंग के नाम पर परेशान कर रही है। कागजात दिखाने के बाद भी उन्हें घंटों परेशान होना पड़ रहा है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि आचार संहिता के अनुपालन में कोई ढील नहीं दी जा सकती। समुचित कागजात के साथ कैश लेकर आने-जाने वाले कारोबारियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
पिछले दिनों पड़ाव स्थित एक यूनिट के मालिक पंकज अग्रवाल श्रमिकों को देने के लिए कैश लेकर जा रहे थे। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रोका। उन्होंने पूरी बात बताई लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। इसी प्रकार उद्यमी आरके चौधरी को भी दो लाख कैश के साथ दो घंटे से ज्यादा समय तक रोककर रखा गया था।
जबकि उन्होंने बताया कि ये पैसे कर्मचारियों की सैलरी बांटने के लिए वह ले जा रहे हैं। दरअसल, आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर कैश लेकर चलने वालों की चेकिंग की जा रही है। पुलिस-प्रशासन का दावा है कि जो भी लोग कैश के बारे में समुचित जानकारी और कागजात उपलब्ध करा रहे हैं, उन्हें कतई परेशान नहीं किया जा रहा है।
जो मामले संदिग्ध समझ में आते हैं, उनकी पूरी पड़ताल जरूरी हो जाती है। उधर, व्यापारिक संगठनों का कहना है कि कैश लेकर आना-जाना उनका रोज का काम है। कारोबार के सिलसिले में आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में जिस वक्त पुलिस चेकिंग करे, उस वक्त सभी कागजात मौके पर उपलब्ध हों।
पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह व्यापारी को परेशान या डराने-धमकाने की कार्रवाई न करे बल्कि उसे कागजात उपलब्ध कराने का मौका दे। व्यापारियों ने चुनाव के साथ ही लगन के सीजन को देखते हुए कैश लेकर चलने की पचास हजार की लिमिट को बढ़ाकर ढाई लाख करने की भी मांग कर रहे हैं।