Ravidas Jayanti: मिनी पंजाब में बदला बनारस का सीरगोवर्धनपुर, सीएम योगी ने पढ़ा पीएम मोदी का संदेश, बोले...
संत रविदास की जयंती पर उनकी जन्मस्थली वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर में पंजाब से लेकर विदेशों तक के रैदासी यहां पहुंचे। सीएम योगी ने भी संत रविदास मंदिर में मत्था टेका।
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मन चंगा तो कठौती में गंगा कह कर संत रविदास ने समाज को कर्म का बड़ा ही व्यापक संदेश दिया। आज का दिन पावन है। आज से 646 वर्ष पहले काशी की इस पावन धरा पर एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई। तत्कालीन भक्तिमार्ग के प्रख्यात संत सद्गुरु रामानंद महाराज के सानिध्य में संत रविदास ने अपनी तपस्या और साधना के माध्यम से सिद्धि प्राप्त की। उसी सिद्धि के प्रसाद स्वरूप मानवता के कल्याण का मार्ग आज किस तरह प्रशस्त हो रहा है, ये हम सबको साफ दिखाई देता है। यह कहना है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को सुबह 9:30 बजे श्रमसाधक संत रविदास की 646वीं जयंती पर सीरगोवर्धनपुर स्थित मंदिर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने संत के चरणों में शीश नवाया, फिर भक्तों और श्रद्धालुओं को संत रविदास जयंती की बधाई दी। साथ ही रविदासिया धर्म के प्रमुख संत निरंजन दास से मुलाकात करके उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुभकामना संदेश पढ़कर सुनाया।
संत रविदास के चरणों में फूल-माला अर्पित करके कुछ देर के लिए मंदिर में ही बैठ गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सदगुरु ने भक्ति के साथ ही कर्म साधना को सदैव महत्व दिया। मैं, आज सबसे पहले केंद्र और राज्य सरकार की ओर से उपस्थित सभी श्रद्धालुओं, भक्तों और सीर गोवर्धन से जुड़े सभी शुभचिंतकों को लख लख बधाइयां देता हूं।
पीएम नरेंद्र मोदी का संदेश लेकर सीरगोवर्धन पहुंचे मुख्यमंत्री योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश लेकर सीरगोवर्धन स्थित संत रविदास के मंदिर पहुंचे। उन्होंने संत निरंजन दास से मुलाकात की और प्रधानमंत्री का संदेश पढ़कर सुनाया। प्रधानमंत्री ने संत रविदास की जयंती पर देशवासियों की ओर से उनको श्रद्धा पूर्वक नमन किया। साथ ही कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रसन्नता जाहिर की और लिखा कि सामूहिकता के सामर्थ्य के साथ उनके दिखाए गए रास्ते पर चलकर 21वीं सदी में भारत को निश्चय ही नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने संदेश में लिखा कि संत रविदास जी के विचारों का विस्तार असीम है। उनके दर्शन और विचार सदैव प्रासंगिक हैं। उन्होंने ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां किसी भी प्रकार का भेदभाव ना हो। सामाजिक सुधार और समरसता के लिए आजीवन प्रयत्नशील रहे। वे कहते थे ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सभन को अन्न, छोट बड़ो सब समान बसे, रविदास रहे प्रसन्न..। समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए उन्होंने सौहार्द और भाईचारे की भावना पर बल दिया।