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UP Politics: सीएम योगी बोले- नीति, न्याय कैसा होगा, आज भी यह सम्राट विक्रमादित्य की नीति तय करती है

Fri, 03 Apr 2026 09:15 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 03 Apr 2026 09:15 PM IST
सार

Varanasi News: बरेका ग्राउंड में विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन देखने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे। सीएम मोहन यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 

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CM Yogi and CM Mohan Yadav Inaugurate Vikramaditya Mahanatya in Varanasi
वाराणसी में यूपी के सीएम योगी और एमपी के सीएम मोहन यादव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नीति कैसी होगी, न्याय कैसा होगा यह आज भी सम्राट विक्रमादित्य की नीति तय करती है। लव के बाद भगवान राम का मंदिर यदि किसी ने बनवाया तो वह महाराज विक्रमादित्य ही थे। ये बातें शुक्रवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेका में विक्रमादित्य महानाट्य के शुभारंभ अवसर पर कहीं। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ कार्यक्रम महानाट्य का शुभारंभ किया।

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यूपी और एमपी के मुख्यमंत्री शाम करीब छह बजे काशी पहुंचे थे। एमपी के सीएम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत किया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 700 किलोग्राम की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भेंट की जिसे शनिवार को श्रीकाशी विश्वनाथ में स्थापित किया जाएगा। 
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज यह सांस्कृतिक बंधन प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और उनकी प्रेरणा से सशक्त हो रहा है। काशी सनातन परंपराओं की महत्वपूर्ण नगरी है। मां गंगा के तट पर इस महान नाट्य रूपांतरण की पहली प्रस्तुति इसलिए भी विशेष बन जाती है। यह परंपरा मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी क्योंकि आज तो हम लोग बड़ी उत्सुकता के साथ इस नई कृति को मंचन के माध्यम से दिखा रहे हैं। जब हम लोग महाराज विक्रमादित्य की बात करते हैं, तो नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय भी माने गए हैं। 

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CM Yogi and CM Mohan Yadav Inaugurate Vikramaditya Mahanatya in Varanasi
वाराणसी में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला

विक्रमादित्य की परंपरा में महाराज भर्तृहरि नाथ संप्रदाय में प्रतिष्ठित हुए। उनकी दीक्षा की भूमि उज्जैन थी, वही उनकी साधना की भूमि काशी के निकट चुनार का किला रहा। कहा जाता है कि चुनार किले का निर्माण भी महाराज भर्तृहरि के नाम से जुड़ा हुआ है। तीन भाइयों जोड़ी जगत में विख्यात है। भगवान राम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की जोड़ी से मिलता है। उसी प्रकार भर्तृहरि और महाराज विक्रमादित्य की जोड़ी भी उतनी ही प्रसिद्ध है।

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जब इस नाट्य रूपांतरण की प्रस्तुति का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के समक्ष आया, तो मेरा पहला सुझाव था कि इसका आयोजन काशी में किया जाए। इसके लिए जिला प्रशासन से भी चर्चा हुई। साथ ही, यह प्रस्ताव भी रखा गया कि यदि बरेका में पहले से कोई अन्य कार्यक्रम निर्धारित हो, तो चुनार को भी आयोजन स्थल के रूप में चुना जा सकता है क्योंकि वह महाराज भर्तृहरि की साधना स्थली रही है।

अयोध्या को भी महाराज विक्रमादित्य ने ही खोजा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या को भी महाराज विक्रमादित्य ने ही खोजा था, उसकी अपनी कथा है। उसके शास्त्रीय प्रमाण भी उन्होंने प्रस्तुत किए थे। वह सभी कुछ आज भी मौजूद है। लव के बाद भगवान राम का मंदिर अगर किसी ने सबसे पहले बनाया तो वह महाराज विक्रमादित्य ने ही बनाया था। पंचाग की धरती काशी और कालगणना की धरती उज्जैन इन दोनों का समावेश सुखद है। कहाकि दुनिया के कई देशों आबादी 66 करोड़ नहीं है, उतने तो उप्र के पिछले साल प्रयागराज में हुए महाकुंभ में श्रद्धालु पहुंचे थे।

काल की गति पहचानें, तभी होगी महाकाल की कृपा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी, बाबा विश्वनाथ की पावन धरा है, जो विश्व के नाथ हैं। वहीं उज्जैन महाकाल की पावन नगरी है। यह स्मरण रखना चाहिए कि जो काल का अनादर करता है, उसे महाकाल स्वयं अपने अधीन कर लेते हैं। महाकाल की धारा का केंद्र यदि कहीं है, तो वह उज्जैन ही है, जहां वे साक्षात विराजमान हैं। उनकी कृपा उन सभी पर बरसती है, जो काल की गति को पहचानकर स्वयं को उसके अनुरूप ढालते हैं।

पहले फिल्मों में खलनायक को नायक दिखाते थे
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं फिल्म निर्देशकों से हमेशा कहता हूं कि फिल्में ऐसी आनी चाहिए जो राष्ट्र के लिए प्रेरणा बनें। किसी डकैत को हीरो के रूप में प्रस्तुत न करिए। एक समय में अच्छे पात्रों को खलनायक के रूप में प्रस्तुत करते थे और खलनायकों को नायक बनाकर प्रस्तुत करते थे और परिणाम पीढि़या खराब हुईं। कहा कि अब समय बदल गया है। आप देख रहे होंगे अब किस प्रकार की प्रस्तुति हो रही है।

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