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Christmas 2022: वाराणसी के इस गिरजाघर में होती है भोजपुरी में प्रार्थना, क्रिसमस पर विशेष तैयारी

Sun, 18 Dec 2022 12:56 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 18 Dec 2022 12:56 PM IST
सार

वाराणसी के महमूरगंज में एक ऐसा चर्च भी है जहां प्रभु यीशु के लिए भोजपुरी में प्रार्थना होती है। बेथेल फुल गोस्पेल चर्च को भोजपुरी चर्च के नाम से भी जाना जाता है। 

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Christmas 2022 Prayer in Bhojpuri in this church of Varanasi this time special preparation
बेथेल फुल गोस्पेल चर्च - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी पूरी दुनिया में मंदिरों के लिए जानी जाती है। वहीं, महमूरगंज में एक ऐसा चर्च भी है जहां प्रभु यीशु के लिए भोजपुरी में प्रार्थना होती है। हर रविवार को लोग यहां भोजपुरी में प्रार्थना करने आते हैं। क्रिसमस पर भी विभिन्न आयोजन होते हैं। सबसे खास प्रार्थना यीशु आवा ना हमरो नगरिया... है। 

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बेथेल फुल गोस्पेल चर्च को भोजपुरी चर्च के नाम से भी जाना जाता है। 1986 में निर्माण के बाद भोजपुरी को बढ़ावा देने के लिए इसी भाषा में प्रार्थना शुरू की गई जो आज तक जारी है।  प्रभु यीशु की प्रार्थना के साथ कैरल भी भोजपुरी में सुनने को मिलती है। पादरी एंड्रयू थॉमस ने बताया कि भोजपुरी भाषा में प्रार्थना कराने के पीछे का मकसद भोजपुरी का प्रचार-प्रसार करना है।
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चर्च में आने वाले लोग अंग्रेजी के बजाय भोजपुरी में प्रार्थना करते हैं। इससे उन्हें खुशी मिलती है। क्रिसमस मौके पर होने वाले गीत-संगीत के विभिन्न आयोजन भी कलाकार भोजपुरी में करते हैं। खास बात ये है कि सभी धर्मों के लोग इस चर्च में आते हैं और इस अनोखे और अद्भुत आयोजन का आनंद लेते हैं।

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बनारस का यह चर्च है बड़ा खास

Christmas 2022 Prayer in Bhojpuri in this church of Varanasi this time special preparation
इसी चर्च के कारण गिरजाघर नाम से जाना जाता है इलाका - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी शहर के बीचोंबीच गोदौलिया के पास है गिरजाघर चौराहा। इसी नाम से इस इलाके को भी जाना जाता है। यहां पर प्रभु यीशु के शिष्य सेंट थॉमस ने आराधना की थी। वह मद्रास से चलकर काशी आए थे। बाद में यहां गिरजाघर की स्थापना की गई और उसका नाम सेंट थॉमस चर्च रखा गया।  

सैकड़ों साल पहले प्रभु यीशु के 12 शिष्यों में एक सेंट थॉमस भारत यात्रा के दौरान मद्रास से चलकर काशी पहुंचे थे। यहां उन्होंने गिरजाघर इलाके में प्रवास किया था, जहां उस वक्त जंगल हुआ करता था। प्रवास के दौरान वह क्रूस लगाकर आराधना करते थे। यहीं पर उन्होंने अपना यात्रा वृत्तांत भी लिखा था। बाद में वह मद्रास लौट गए और वहीं रह गए।

बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी के एक सिपाही जॉन थोमर ने सेंट थॉमस के यात्रा वृत्तांत को पढ़ा और यहां आकर उस जगह की खोज की, जहां सेंट थॉमस ने प्रवास के दौरान प्रभु यीशु की आराधना की थी।  फिर यहां चर्च का निर्माण कराया और उसे सेंट थॉमस चर्च नाम दिया। अब यह चर्च सीएनआई द्वारा संचालित होता है। क्रिसमस के समय यहां भव्य सजावट की जाती है। पादरी न्यूटन स्टीवन के अनुसार यह काशी का ऐतिहासिक गिरजाघर है।

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