{"_id":"574606574f1c1bd53c690ccb","slug":"children-s-parliament-will-form-the-school-of-democracy-for-children","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाल संसद बनेगी बच्चों के लोकतंत्र की पाठशाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाल संसद बनेगी बच्चों के लोकतंत्र की पाठशाला
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 26 May 2016 01:38 AM IST
विज्ञापन
बाल संसद चुनाव के लिए प्रत्याशी बने बच्चे अमर उजाला कार्यालय में अपने प्रचार पोस्टर के साथ।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नए बाल संसद का गठन आगामी 10 जून को हो रहा है। नन्हे मुन्ने बच्चों को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने के लिए ये पहल विशाल भारत संस्थान की ओर से की गई है। इसके तहत तीन जून को नामांकन होगा, छह जून को मतदान और 10 जून को परिणाम की घोषणा की जाएगी। बुधवार को सांसद पद के प्रत्याशियों ने अमर उजाला कार्यालय में पहुंचकर अपनी पार्टी, अपने मुद्दों को बेबाकी से साझा किया। बच्चों की शिक्षा, उनकी आजादी, शांति, पर्यावरण जैसे मुद्दों को लेकर ये बच्चे चुनाव लड़ रहे हैं। बता दें कि बुधवार को मौजूदा संसद को भंग कर दिया गया।
बाल विकास पार्टी की प्रत्याशी नायला अयाज ने बच्चों की शिक्षा के मुद्दे चुनाव लड़ने का अपना पक्ष रखा। इसी तरह सृष्टि ने अपनी पार्टी बाल गंगा रक्षा पार्टी का मुद्दा रखा मल्लाहों के बच्चों की शिक्षा और गंगा की रक्षा। कन्या रक्षा पार्टी की पूजा ने बताया कि वो लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करना चाहती हैं। ऐसे ही खुशी रमन, जैनब और तौहीद आलम ने भी अपने अपने मुद्देे को रखा। सबके अपनी मुद्दे हैं, सबका अपना चुनाव चिह्न है।
इस चुनाव के जरिये ये बच्चे ना सिर्फ लोकतंत्र में अपनी गहरी छाप छोड़ना चाहते हैं बल्कि उनकी एक कोशिश है कि वो बड़ों के सामने निष्पक्ष और बेहद लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव लड़ने की नजीर पेश कर सकें। इसलिए ये बच्चे ना किसी आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं और ना ही किसी को टॉफी, बिस्किट, पैसों का लालच देकर वोट हासिल करने की उनकी नियत है। न धर्म के नाम पर वोट न जाति के नाम। ये बच्चे पूरा प्रचार प्रसार भी करेंगे और जीतने के बाद ढोल नगाड़ों संग जुलूस भी निकालेंगे लेकिन सब कुछ अपनी पॉकेट मनी से।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाल विकास पार्टी की प्रत्याशी नायला अयाज ने बच्चों की शिक्षा के मुद्दे चुनाव लड़ने का अपना पक्ष रखा। इसी तरह सृष्टि ने अपनी पार्टी बाल गंगा रक्षा पार्टी का मुद्दा रखा मल्लाहों के बच्चों की शिक्षा और गंगा की रक्षा। कन्या रक्षा पार्टी की पूजा ने बताया कि वो लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करना चाहती हैं। ऐसे ही खुशी रमन, जैनब और तौहीद आलम ने भी अपने अपने मुद्देे को रखा। सबके अपनी मुद्दे हैं, सबका अपना चुनाव चिह्न है।
विज्ञापन
इस चुनाव के जरिये ये बच्चे ना सिर्फ लोकतंत्र में अपनी गहरी छाप छोड़ना चाहते हैं बल्कि उनकी एक कोशिश है कि वो बड़ों के सामने निष्पक्ष और बेहद लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव लड़ने की नजीर पेश कर सकें। इसलिए ये बच्चे ना किसी आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं और ना ही किसी को टॉफी, बिस्किट, पैसों का लालच देकर वोट हासिल करने की उनकी नियत है। न धर्म के नाम पर वोट न जाति के नाम। ये बच्चे पूरा प्रचार प्रसार भी करेंगे और जीतने के बाद ढोल नगाड़ों संग जुलूस भी निकालेंगे लेकिन सब कुछ अपनी पॉकेट मनी से।
विज्ञापन