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बाल अधिकार दिवसः नियम-कानूनों से दूरी, खत्म नहीं हो पाई बाल मजदूरी 

Tue, 20 Nov 2018 01:46 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 20 Nov 2018 01:46 PM IST
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Children rights day child labor was not end
बच्चों के अधिकारों को लेकर कोई गंभीर नहीं है। हर जगह बच्चों के अधिकारों की अनदेखी की जाती है। आज भी बच्चों को होटलो-चाय की दुकानों में काम करते हुए, गुब्बारे और खिलौने बेचते हुए देखा जा सकता है।
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सरकारी और गैरसरकारी संस्थानों के विभिन्न जागरूकता अभियानों के बावजूद बाल मजदूरी की समस्या खत्म नहीं हुई है। बच्चों को लेकर समाज के रवैये का अंदाज 14 नवंबर को बाल दिवस के मौके पर एक बच्चे को रोटी मांगने पर गोली मारने की घटना से जाहिर हो जाता है।
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1959 में बाल अधिकारों की घोषणा 20 नवंबर 2007 को स्वीकार की गई थी। बाल अधिकारों में जीवन का अधिकार, पहचान, भोजन, पोषण ओर स्वास्थ्य, विकास, शिक्षा और मनोरंजन, नाम और राष्ट्रीयता आदि शामिल हैं। भारत में बच्चों की देखभाल और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए मार्च, 2007 में राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने संवैधानिक संस्था बनाई है। 
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इनका कहना है

बीएचयू में समाजशास्त्री प्रो. एके जोशी का कहना है कि बेहतर शिक्षा और जरूरी मेडिकल सुविधाओं के साथ-साथ उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार के मामलों में कार्रवाई के लिए बच्चों को कई अधिकार दिए गए हैं। प्रबुद्ध लोगों के साथ बच्चों के माता-पिता का दायित्व है कि वे बच्चों को इनके बारे में जागरूक करें।

बाल गृह शिशु की समन्वयक यहुशाफत शाहपुरी का कहना है कि बाल मजदूरी में कमी आई है। 1979 में केंद्र सरकार ने बाल मज़दूरी की समस्या से निजात के लिए उपाय सुझाने के लिए गुरुपाद स्वामी समिति गठित की थी। समिति ने राय दी थी कि जब तक गरीबी बनी रहेगी तब तक बाल मजदूरी को हटाना संभव नहीं होगा। 
 
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