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UP : एक मां को बेटी देने के एवज में की गई रुपयों की मांग, जानिए मामला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Wed, 13 Jun 2018 11:01 AM IST
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एक मां ने नौ महीने जिस बेटी को अपने गर्भ में रखा। जब वह दुनिया में आई तो मां की खुशी का ठिकाना नहीं था। अब उसी मां को उसकी ही बेटी को वापस करने के लिए रुपए की मांग की गई। मामला यूपी के सोनभद्र जिले का है।
जिले के बभनी की रहने वाली शिक्षिका ममता के मुताबिक 16 जनवरी 2014 को वाराणसी में दो जुड़वा बेटियों को जन्म दिया था। एक साथ दो बच्चों को पालने को लेकर समस्या हुई तो ममता पर परिवार के लोग कुछ सालों के लिए बाल कल्याण समिति में एक बेटी को भिजवाने का दबाव बनाने लगे।
12 अगस्त 2014 को जिला बाल कल्याण समिति में एक बेटी को भेज दिया। इस बीच हर सप्ताह ममता बेटी से मिलने आती-जाती रही ताकि उसे मां और बेटी के रिश्ते के बारे में जानकारी होती रहे।
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दो अक्तूबर 2017 को बेटी ममता के साथ जाने की जिद करने लगी तो वह बेटी को अपने साथ लेकर चली गई। 10 अक्तूबर को परिवार का एक व्यक्ति जबरदस्ती बेटी को वापस बाल कल्याण समिति छोड़ आया। चूंकि बेटी बड़ी हो गई थी। इस नाते ममता उसे अपने पास रखना चाहती थी।
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जिले के बभनी की रहने वाली शिक्षिका ममता के मुताबिक 16 जनवरी 2014 को वाराणसी में दो जुड़वा बेटियों को जन्म दिया था। एक साथ दो बच्चों को पालने को लेकर समस्या हुई तो ममता पर परिवार के लोग कुछ सालों के लिए बाल कल्याण समिति में एक बेटी को भिजवाने का दबाव बनाने लगे।
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12 अगस्त 2014 को जिला बाल कल्याण समिति में एक बेटी को भेज दिया। इस बीच हर सप्ताह ममता बेटी से मिलने आती-जाती रही ताकि उसे मां और बेटी के रिश्ते के बारे में जानकारी होती रहे।
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दो अक्तूबर 2017 को बेटी ममता के साथ जाने की जिद करने लगी तो वह बेटी को अपने साथ लेकर चली गई। 10 अक्तूबर को परिवार का एक व्यक्ति जबरदस्ती बेटी को वापस बाल कल्याण समिति छोड़ आया। चूंकि बेटी बड़ी हो गई थी। इस नाते ममता उसे अपने पास रखना चाहती थी।
अधिकारी की सेवा समाप्त
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उधर, समिति का तर्क था कि नियम के मुताबिक लड़की के बालिग होने के बाद ही वह अपने साथ ले जा सकेगी। वह आकर सिर्फ मिल सकती है। इस दौरान वह थाने से लेकर तहसील दिवस में शिकायत करती रही।
सुनवाई के दौरान चार जनवरी 2018 को उन्हें बाल कल्याण समिति में जाने को कहा गया। आरोप है कि इस दौरान बाल संरक्षण अधिकारी सतेंद्र गुप्ता ने उससे 30 हजार रुपये की मांग की। 15 मई को ममता देवी ने प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास को शिकायती पत्र भेजा।
दो जून को शासन के निर्देश के बाद डीएम ने दोनों पक्षों को बुलाया। ममता ने डीएम को साक्ष्य सौंपे जिसमें बाल संरक्षण अधिकारी सतेंद्र दोषी पाए गए।
इस पर डीएम ने बाल संरक्षण अधिकारी सत्येंद्र कुमार गुप्ता की संविदा समाप्त कर दी।
साथ ही पूर्व में मामले की जांच करने वाले जिला प्रोवेशन अधिकारी प्रदीप तिवारी और बाल कल्याण समिति की जांच एसडीएम सदर को सौंप दी है। सीओ विवेकानंद तिवारी ने कहा सतेंद्र गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सुनवाई के दौरान चार जनवरी 2018 को उन्हें बाल कल्याण समिति में जाने को कहा गया। आरोप है कि इस दौरान बाल संरक्षण अधिकारी सतेंद्र गुप्ता ने उससे 30 हजार रुपये की मांग की। 15 मई को ममता देवी ने प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास को शिकायती पत्र भेजा।
दो जून को शासन के निर्देश के बाद डीएम ने दोनों पक्षों को बुलाया। ममता ने डीएम को साक्ष्य सौंपे जिसमें बाल संरक्षण अधिकारी सतेंद्र दोषी पाए गए।
इस पर डीएम ने बाल संरक्षण अधिकारी सत्येंद्र कुमार गुप्ता की संविदा समाप्त कर दी।
साथ ही पूर्व में मामले की जांच करने वाले जिला प्रोवेशन अधिकारी प्रदीप तिवारी और बाल कल्याण समिति की जांच एसडीएम सदर को सौंप दी है। सीओ विवेकानंद तिवारी ने कहा सतेंद्र गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।