सुकमा के नक्सली हमले में मऊ और बलिया के लाल शहीद, परिवार में मचा कोहराम
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उन्होंने बताया कि शहीद का पार्थिव शरीर बुधवार तक पैतृक गांव भेड़ियाधर आने की संभावना है। भेड़ियाधर गांव निवासी किसान खेदन यादव के तीन पुत्रों में सबसे छोटे बेटे धमेंद्र यादव उर्फ बबलू (30) साल 2004 में इलाहाबाद से सीआपीएफ में भर्ती हुए थे।
इसके बाद धर्मेंद्र की तैनाती जम्मू, आसाम और गुजरात के बाद छत्तीसगढ़ में हुई। इन दिनों धर्मेंद्र की बटालियन सुकमा में तैनात थी। वह नक्सलियों के हमले में अपने साथियों के साथ शहीद हो हो गए। मंगलवार को सीआरपीएफ हेड क्वार्टर से तीन बजे फोन से धर्मेंद्र की शहादत की सूचना परिवार को दी गई।
फोन धर्मेंद्र के बड़े भाई महेंद्र ने रिसीव किया। सूचना मिलते ही जवान की मां प्रभावती, पिता खेदन और बडे़ भाई जितेंद्र और घर की महिलाओं में चीख पुकार मच गई। जवान के घर भीड़ एकत्र हो गई।
शहीद की पत्नी उमा यादव और तीन बच्चे इलाहाबाद स्थित सीआरपीएफ सेंटर फाफामऊ में रहते हैं। उनको लाने के लिए रिश्तेदार रवाना हो गए थे। धर्मेंद्र की तीनों बच्चे वहीं पढ़ते हैं। सबसे बड़ा बेटा विकास (11), बेटियां संध्या (8) और पूनम (5) हैं।
बता दें कि मंगलवार को हुए सुकमा नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 9 जवान शहीद हो गए हैं। यह हमला सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके में हुआ है। नक्सलियों ने इस घटना को लैंडमाइन के जरिए अंजाम दिया है। इस घटना के दौरान नक्सलियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच मुठभेड़ में 6 जवान घायल हुए हैं। वहीं 4 जवानों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।
दो दिन पूर्व परिवार के सदस्यों से हुई थी फोन पर बात
नक्सली हमले में धर्मेंद्र के शहीद होने की सूचना सबसे पहले उसके बड़े भाई महेंद्र यादव को उसकी मोबाइल पर सीआरपीएफ कैंप कार्यालय से दी गई। उस समय करीब तीन बज रहा था, महेंद्र इस समय अक्सर चिरैयाकोट बाजार में रहता है, लेकिन मंगलवार को संयोग ही था कि वह घर पर था।
महेंद्र के अनुसार सूचना पर उसे यकीन नहीं हुआ, इस दौरान वह दुबारा उस नंबर पर खुद फोन मिलाया। इस दौरान सूचना की पुष्टि होने पर वह काफी देर तक अवाक रहा। इसके बाद उसने हिम्मत जुटाकर इस सूचना से वृद्ध पिता और मां प्रभावती के साथ परिवार के अन्य सदस्यों का दिया।
फिर क्या था, पल भर में घर का माहौल गमगीन हो गया। इस दौरान पास पड़ोसी अवाक थे, कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि परिवार के सभी सदस्य रो रहें। बाद में पड़ोसियों के साथ पूरे गांव को इस घटना की जानकारी हो गई। बताते चलें कि दो माह पूर्व धर्मेंद्र 10 दिनों के लिए घर आया था।
धर्मेंद्र की पत्नी उमा यादव अपने बच्चों तीन बच्चों को पढ़ाने के लिए इलाहाबाद के फाफा मऊ स्थित सीआरपीएफ कैंप में रहती हैं। बेटे की मौत की सूचना मिलने पर परिवार के सभी सदस्य रोने लगे, लेकिन मां प्रभावती जवान बेटे हमले में शहीद होने की सूचना मिलने पर पछाड़े खाकर जमीन पर गिर गई। रोते-रोते प्रभावती बेटे की यादों को बयां कर रही थी, इस दौरान प्रभावती के मुंह से निकल रहा था अब केकरे सहरवा जियब हो मईया, केके ललवा बोलाइब हो मईया, केकर रहिया निहारब हो मईया। इन शब्दों को सुनकर वहां मौजूद सभी लोग फफक कर रोने लगे।
17 साल से सुकमा में थे
मनोज छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ में 17 साल से कांस्टेबिल थे। थाना क्षेत्र के उसरौली निवासी शहीद मनोज के पिता नरेंद्र नारायण सिंह भी सीआरपीएफ से ही अवकाश प्राप्त हैं। अपने नौजवान बेटे के शहीद होने की सूचना मिलने पर वे गमगीन थे।
घर के भीतर मनोज की पत्नी सुमन रो रही थी। पड़ोस की महिलाएं उसे संभाल रही थी। मनोज कुमार सिंह के दो बेटे प्रिंस 6 वर्ष और प्रतीक 4 वर्ष हैं। उनको देखकर हर किसी की आंखें नम थीं। इस दौरान गांव में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई थी।
परिजनों के अनुसार मनोज कुमार सिंह 15 दिन की छुट्टी बिताकर शनिवार 10 मार्च को ड्यूटी के लिए घर से लौटे थे। संयुक्त मकान में रह रहे मनोज सिंह अलग मकान बनाने के लिए योजना बनाकर घर से गए थे। उनका सपना अलग मकान बनाने का था। शहीद का एक भाई दिल्ली में प्राइवेट सर्विस करता है। लोगों को मनोज के शव आने की प्रतीक्षा है।