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Chaturmas 2024: चातुर्मास में विष्णु भक्त प्रिय वस्तुओं और बुराइयों का करेंगे त्याग, मंदिरों में होंगे जप-तप
Tue, 16 Jul 2024 05:29 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 16 Jul 2024 05:29 PM IST
सार
चातुर्मास में अभीष्ट की सिद्धि के लिए भक्त प्रिय वस्तुओं का त्याग करेंगे। वहीं हरिशयनी एकादशी पर भगवान चार महीने योग निद्रा में जाएंगे। इस दौरान मंदिरों में जप-तप और अनुष्ठान होंगे। साथ ही विष्णु मंदिरों में विविध अनुष्ठान होंगे।
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भगवान विष्णु
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
हरिशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में जाएंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। मंदिरों में जप-तप अनुष्ठान के साथ ही भगवान विष्णु की आराधना होगी। भक्त गुरु के आदेश पर चातुर्मास में अभीष्ट की सिद्धि के लिए प्रिय वस्तुओं का त्याग करेंगे।
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17 जुलाई को हरिशयनी एकादशी से चातुर्मास के अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। आदिकेशव मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान आदिकेशव के आरती और भोग में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। नियमित रूप से होने वाली आरती और भोग भगवान को अर्पित किए जाएंगे।
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गोपाल मंदिर के अतुल शाह ने बताया कि भगवान के चार महीने विश्राम के दौरान हम लोग भी यम नियम और संयम का पालन करते हैं। इन चार महीने के दौरान हम लोग अपनी कोई न कोई प्रिय चीज का त्याग कर देते हैं। कुछ लोग अपनी बुरी आदतों को त्यागने का संकल्प लेते हैं और चार महीने तक इसका पालन करते हैं।
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भूमि पर शयन और पलाश के पत्तों पर है भोजन का नियम
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि देवशयनी के दिन भगवान विष्णु पाताल में सोने चले जाते हैं, इसलिए देवशयनी से देव प्रबोधिनी एकादशी तक मनुष्य को पलंग पर नहीं सोना चाहिए। इस समय में जो व्यक्ति भूमि पर शयन करता है और पलाश के पत्तों पर भोजन करता है। नियमित दीप दान करता है और ब्रह्मचर्य का पालन करता है वह पाप मुक्त व्यक्ति बैकुंठ में स्थान पाता है और भगवान की सेवा में रहता है।