फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Chaos in BHU campus and no action on criminals

बीएचयू बवालः परिसर में आए दिन हो रही अराजकता, कार्रवाई के नाम पर एफआईआर और जांच का एलान

Sat, 23 Dec 2017 03:50 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sat, 23 Dec 2017 03:50 PM IST
विज्ञापन
Chaos in BHU campus and no action on criminals
BHU
देश के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में शुमार बीएचयू में चंद छात्र जब चाहते हैं, अराजकता का नंगा नाच कर देते हैं। जब कार्रवाई की बात होती है तो एफआईआर होती है और जांच के एलान तक कार्रवाई सीमित रह जाती है।
विज्ञापन


परिसर में छात्राओं संग खुलेआम छेड़खानी हो रही है तो मारपीट, तोड़फोड़, और आगजनी की घटनाएं हर बार प्रशासन की लाचारी को बयां कर देती हैं। कार्रवाई के नाम पर विश्वविद्यालय प्रशासन ही असहाय नहीं दिखता, बवाल की चपेट में आने वाले लोग उफ करके ही रह जाते हैं।
विज्ञापन


उनकी शिकायत कहीं नहीं सुनी जाती है। तीन महीने में परिसर दो बार सुलग चुका है और अभी तक जांच के अलावा कुछ भी नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था के लिए दस करोड़ रुपये से अधिक का सालाना बजट है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके तहत 600 सुरक्षा गार्ड, 40 से अधिक सुरक्षा अधिकारी, करीब 40 गनमैन गार्डों के अलावा 189 चौकीदार तैनात हैं। फिर भी बवाल होने पर परिसर में रहने वाले 20 हजार छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों के परिवारीजनों की सांसें थम जाती हैं।

सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती मरीज, डॉक्टर और इनके तीमारदार बंधक जैसी स्थिति में पहुंच जाते हैं। माहौल खराब होने पर कोई न तो किसी को पहचानता है और न ही कोई किसी की मदद करता है।

यही नहीं, परिसर में एक दिन का बवाल आने वाले दो-तीन दिन तक डर के कारण छात्र-छात्राओं के पांव परिसर में आने से रोक देता है। परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर में रोजाना पांच हजार से अधिक श्रद्धालु बाहर से आते हैं और उन्हें रास्तों की जानकारी नहीं होती है। बवाल होने पर वह यहां से विश्वविद्यालय की दागदार छवि लेकर लौटते हैं। 

नए कुलपति के लिए होगी बड़ी चुनौती

Chaos in BHU campus and no action on criminals
बीएचयू लंका गेट - फोटो : File Photo
आए दिन परिसर में होने वाली घटनाओं पर 30 सदस्यीय प्रॉक्टोरियल बोर्ड अंकुश लगाने में हर बार फेल हो जाता है। 21 सितंबर से 23 सितंबर तक छेड़छाड़ के विरोध में छात्राओं के आंदोलन के बाद बने नए प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कमान पहली बार महिला शिक्षक को सौंपी गई थी। कुछ दिन के बाद उनकी सक्रियता कम हो गई।

अब इसका फायदा अराजक तत्व उठा रहे हैं। सितंबर की घटनाओं के लिए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी को जिम्मेदार मान लिया गया था लेकिन प्रो. त्रिपाठी का कार्यकाल पूरा होने के बाद हालात और खराब हो गए हैं।

विश्वविद्यालय से जुड़े लोग मानने लगे हैं कि नए कुलपति के लिए परिसर का माहौल सुधारना बड़ी चुनौती होगी। कह रहे हैं कि आने वाले कुलपति अगर शिक्षाविद होने के साथ-साथ प्रशासनिक अनुभव वाले नहीं होंगे तो उनके लिए यहां की स्थिति को संभालना मुश्किल होगा।

आईआईटी बीएचयू के डायरेक्टर और कुछ समय के लिए ही कुलपति पद की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रो. राजीव संगल को लोग अभी भी सख्त प्रशासक के तौर पर ही याद करते हैं। परिसर के माहौल को पठन-पाठन के अनुकूल बनाने के लिए प्रो. हरि गौतम को भी याद किया जाता है।

जानकारों की मानें तो छात्रावासों को खाली कराकर उनकी पूरी तरह से जांच-पड़ताल किए बगैर परिसर में अराजकता पर नियंत्रण करना संभव नहीं होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन को एक बार पुलिस और प्रशासन को इस बात की छूट दी जानी चाहिए कि उपद्रवियों पर किसी भी तरह की रियायत नहीं की जानी चाहिए।   

इनका कहना है

Chaos in BHU campus and no action on criminals
bhu - फोटो : file photo
हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल का कहना है कि बीएचयू को ट्रेंड सेंटर होना चाहिए था लेकिन पिछले कुछ समय से ट्रेड सेंटर हो गया है। चिंताजनक है कि ज्ञान का मंदिर धीरे-धीरे उन्माद में बदल जा रहा है। संवाद हिंसा में बदल रहा है। 

कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. कुमार पंकज ने बताया क‌ि शैक्षणिक गतिविधियों को निर्वाध गति से चलाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन की कोशिश हो कि तालमेल स्थापित कर कैंपस को अराजकता से मुक्त कराया जाए।

पूर्व चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओमकार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अधिकारियों-कर्मचारियों को किसी तरह की राजनीति में न पड़ते हुए परिसर का माहौल पढ़ाई लायक बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।

वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आशाराम त्रिपाठी का कहना है कि एक संस्थान में शांति के लिए इससे जुड़े सभी घटकों, जिसमें सबसे अहम भूमिका अभिभावकों की है, उन्हें आगे आना होगा। शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed