{"_id":"5b62c46f4f1c1b0c718b76a1","slug":"chances-for-aiims-in-pm-constituency-grow-up","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":" पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में एम्स के लिए दरवाजे खुले, कभी भी हो सकती है घोषणा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में एम्स के लिए दरवाजे खुले, कभी भी हो सकती है घोषणा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 02 Aug 2018 02:14 PM IST
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एम्स
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में एम्स के लिए दरवाजे खुल गए हैं। एम्स जैसी सुविधाओं के लिए हाल में यहां आई अध्ययन टीम के मूल्यांकन के बाद चार अगस्त को तीन केंद्रीय मंत्री बीएचयू आ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर और रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा परिसर के केएन उडप्पा सभागार में चिकित्सकों के साथ इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे। बताया जा रहा है कि सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक तीन घंटे की चर्चा के बाद अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।
वाराणसी में एम्स जैसी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से चल रही है। पीएम मोदी के यहां से सांसद बनने के बाद इसमें और तेजी आ गई। कुलपति बनने के बाद प्रो. राकेश भटनागर ने भी इसके लिए प्रयास तेज किए। अब इसके लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने की दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी अगले कुछ महीने में इस बारे में घोषणा कर सकते हैं। तीन मंत्रियों की टीम भी पीएमओ के निर्देश पर ही यहां आ रही है।
बीएचयू में एम्स जैसी सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए मई-जून में लगातार पांच बैठकें हुईं। अंतत: 19 जून को स्वास्थ्य मंत्रालय, एम्स और आईएमएस के बीच समझौता हुआ और एम्स की 10 सदस्यीय टीम ने बीएचयू आकर यहां उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों का अध्ययन भी किया।
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टीम ने आईएमएस, अस्पताल की ओपीडी, ट्रॉमा सेंटर आदि का दौरा कर अपनी रिपोर्ट पीएमओ को दी। रिपोर्ट में बीएचयू में एम्स जैसी व्यवस्था की राह में एक बड़ी बाधा का जिक्र किया गया है। कहा गया है कि यहां के चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। इस बारे और कुछ और महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में और ज्यादा खुलासा तीनों मंत्री करेंगे।
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वाराणसी में एम्स जैसी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से चल रही है। पीएम मोदी के यहां से सांसद बनने के बाद इसमें और तेजी आ गई। कुलपति बनने के बाद प्रो. राकेश भटनागर ने भी इसके लिए प्रयास तेज किए। अब इसके लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने की दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी अगले कुछ महीने में इस बारे में घोषणा कर सकते हैं। तीन मंत्रियों की टीम भी पीएमओ के निर्देश पर ही यहां आ रही है।
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बीएचयू में एम्स जैसी सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए मई-जून में लगातार पांच बैठकें हुईं। अंतत: 19 जून को स्वास्थ्य मंत्रालय, एम्स और आईएमएस के बीच समझौता हुआ और एम्स की 10 सदस्यीय टीम ने बीएचयू आकर यहां उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों का अध्ययन भी किया।
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टीम ने आईएमएस, अस्पताल की ओपीडी, ट्रॉमा सेंटर आदि का दौरा कर अपनी रिपोर्ट पीएमओ को दी। रिपोर्ट में बीएचयू में एम्स जैसी व्यवस्था की राह में एक बड़ी बाधा का जिक्र किया गया है। कहा गया है कि यहां के चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। इस बारे और कुछ और महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में और ज्यादा खुलासा तीनों मंत्री करेंगे।
प्रो. विजय नाथ मिश्रा होंगे नोडल अफसर
एमएस प्रो. विजयनाथ
- फोटो : अमर उजाला
जानकारों की मानें तो बीएचयू आईएमएस में एम्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के बाद चिकित्सा अधीक्षक के पद पर नियुक्ति स्वास्थ्य मंत्रालय करेगा। इस पद पर नियुक्ति में स्वास्थ्य मंत्रालय एम्स के मानदंडों का पालन करेगा। बीएचयू का दखल नहीं होगा। इसी तरह आईएमएस में डायरेक्टर का पद भी एम्स की तरह ही भरा जाएगा।
सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विजय नाथ मिश्रा को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में संसाधन-सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नोडल अफसर बनाया गया है। इसमें निर्माणाधीन अस्पताल के काम की मॉनीटरिंग के साथ ही विभागों के लिए मशीनों-उपकरणों सहित अन्य मामलों में प्रो. मिश्र ही स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क करेंगे।