Chaitra Navratri 2023: चैत्र नवरात्र पर काशी में होंगे नौ गौरी के दर्शन, पढ़ें किस देवी की कैसे करें पूजा ?
देवी उपासिका मां गीतांबा तीर्थ ने बताया कि नवरात्रि के प्रथम दिन तीन साल की कन्या की विधि-विधान से पूजा अर्चना कर उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर विदा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नौ दिनों तक आराधना व पूजा करने से माता का आशीर्वाद बना रहता है।
विस्तार
शिव की नगरी वाराणसी में चैत्र नवरात्र पर शक्ति का आवाहन होगा। माता के नौ दुर्गा के साथ ही नौ गौरी स्वरूप का पूजन किया जाएगा। 22 मार्च से 30 मार्च तक नवरात्र के दर्शन पूजन व अनुष्ठान होंगे।
देवी उपासिका मां गीतांबा तीर्थ ने बताया कि नवरात्रि के प्रथम दिन तीन साल की कन्या की विधि-विधान से पूजा अर्चना कर उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर विदा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नौ दिनों तक आराधना व पूजा करने से माता का आशीर्वाद बना रहता है।
पहले दिन मुख निर्मालिका गौरी का पूजन होता है। इनका विग्रह गायघाट स्थित हनुमान मंदिर में स्थित है। शक्ति के उपासक पहले दिन शैलपुत्री देवी का पूजन-अर्चन भी करते हैं। शैलपुत्री का मंदिर अलईपुर इलाके में है।
द्वितीय ज्येष्ठा गौरी
दूसरे दिन ज्येष्ठा गौरी के दर्शन पूजन की मान्यता है। इनका मंदिर कर्णघंटा के सप्तसागर क्षेत्र में है। नव दुर्गा के पूजा के क्रम में दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी देवी का भी दर्शन-पूजन करते हैं। इनका विग्रह ब्रह्माघाट इलाके में है।
तृतीय सौभाग्य गौरी
तीसरे दिन सौभाग्य गौरी के दर्शन का महत्व है। देवी का विग्रह ज्ञानवापी क्षेत्र स्थित सत्यनारायण मंदिर के अंदर है। चंद्रघंटा देवी के दर्शन-पूजन की मान्यता है। इनका मंदिर चौक क्षेत्र में है।
चतुर्थ शृंगार गौरी
चौथे दिन शृंगार गौरी के पूजन की मान्यता है। इन भगवती का विग्रह ज्ञानवापी परिसर में है। शक्ति के उपासक इस दिन कुष्मांडा देवी की आराधना करेंगे। मां दुर्गा का मंदिर दुर्गाकुंड क्षेत्र में स्थित है।पंचम विशालाक्षी गौरी
पांचवें दिन विशालाक्षी गौरी का दर्शन-पूजन होता है। देवी के इस स्वरूप का विग्रह मीरघाट क्षेत्र में धर्मकूप इलाके में है। शक्ति के उपासक इस दिन स्कंद माता के स्वरूप में विराजित मां बागेश्वरी देवी का पूजन अर्चन करेंगे। देवी का मंदिर जैतपुरा इलाके में स्थित है।षष्ठं ललिता गौरी
छठें दिन ललिता गौरी के दर्शन-पूजन का महत्व है। भगवती के इस रूप का विग्रह ललिता घाट क्षेत्र में है। शक्ति उपासक इस दिन कात्यायनी देवी का दर्शन-पूजन करेंगे। देवी का मंदिर संकठा गली में आत्म विशेश्वर मंदिर में है।
सप्तम् भवानी गौरी
सातवें दिन भवानी गौरी के दर्शन-पूजन की मान्यता है। देवी के इस रूप का विग्रह विश्वनाथ गली में श्री राम मंदिर में है। शक्ति के उपासक इस दिन कालरात्रि देवी का पूजन अर्चन करेंगे। कालरात्रि देवी का मंदिर कालिका गली में स्थित है।अष्टम मंगला गौरी
आठवें दिन माता के गौरी स्वरूप के मंगला गौरी के पूजन-अर्चन का विधान है। इनका मंदिर पंचगंगा घाट इलाके में है। शक्ति के उपासक इस दिन महागौरी की अभ्यर्थना करेंगे। यह मंदिर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप माता अन्नपूर्णा के मंदिर के रूप में विख्यात है।
नवम महालक्ष्मी गौरीनौवें दिन भगवती के गौरी स्वरूप में महालक्ष्मी गौरी के पूजन का महात्मय है। इनका मंदिर लक्सा क्षेत्र में लक्ष्मीकुंड पर स्थित है। शक्ति के उपासक इस दिन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी सिद्धदात्री देवी का दर्शन-पूजन करते हैं। इनका मंदिर कालभैरव मंदिर से पहले गोलघर इलाके में स्थित है।
चैत्र नवरात्रि की तैयारी शुरूदेवी मंदिरों की सफाई कराई जा रही है। मंदिरों के बाहर बैरिकेडिंग के साथ ही गर्भगृह से लेकर मंदिर परिक्षेत्र की धुलाई , रंगाई-पुताई चल रही है। सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर, भदैनी स्थित नौ दुर्गा, महिषासुर मर्दिनी, कमच्छा स्थित कामाख्या देवी और बड़ी शीतला मंदिर की भी साफ -सफाई की जा रही है।