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Chaitra Navratri 2022: काशी में मां सिद्धिदात्री के दरबार में उमड़ी भक्तों की भीड़, घरों में कन्याओं संग पूजे जा रहे भैरव
Sun, 10 Apr 2022 01:20 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sun, 10 Apr 2022 01:20 PM IST
सार
चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि पर मैदागिन के पास गोलघर के पीछे स्थित मां सिद्धिदात्री के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ी है। भक्तों ने माता के नवें स्वरूप का दर्शन किया और माता से सिद्धि, सुख, शांति और सौभाग्य की कामना की।
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मंदिर में लगी कतार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भगवान शिव की नगरी काशी में शक्ति की आराधना का उल्लास छाया हुआ है। चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि पर समस्त सिद्धि प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री देवी का दर्शन-पूजन किया जा रहा है। बनारस के मैदागिन के पास गोलघर के पीछे स्थित मां सिद्धिदात्री के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ी है।
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हाथों में नारियल, गुड़हल की माला, लाल चुनरी व प्रसाद लेकर भक्तों के आने का सिलसिला ब्रह्म मुहूर्त से आरंभ हुआ जो देर रात तक चलेगा। भक्तों ने माता के नवें स्वरूप का दर्शन किया और माता से सिद्धि, सुख, शांति और सौभाग्य की कामना की। इसके अलावा दुर्गाकुंड समेत अन्य देवी मंदिरों में भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन-पूजन कर रहे हैं।
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दूसरी ओर मंदिरों, मठों, संस्थाओं और घरों में कन्याओं के साथ भैरव के रूप में बालकों का पूजन-अर्चन किया जा रहा है। रविंद्रपुरी स्थित अघोराचार्य बाबा कीनाराम आश्रम में देवी स्वरूप में नौ कन्याओं एवं भैरव बाबा का पूजन किया गया। कन्याओं के पांव पखारे गए। इसके बाद उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाकर उनका पूजन अर्चन किया गया।
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कन्या पूजन
- फोटो : अमर उजाला
कन्या स्वरूपों का पूजन करके उनको भोग अर्पित किया गया। कन्या भोज के लिए घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए गए। चना, हलवा, पूड़ी और दही का भोग अर्पित किया गया। भोज के उपरांत कन्याओं को दक्षिणा और उपहार देकर विदाई दी गई।
पुराणों के अनुसार महत्व
देवी सहज ही प्रसन्न होकर भक्तों को सर्व सिद्धि प्रदान करती हैं। इसलिए शास्त्रों में देवी को सिद्धिदात्री नाम से पुकारा गया। शिव महापुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव को भी समस्त सिद्धियां माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही प्राप्त हुई थीं। दूसरी तरफ नवरात्र के अंतिम दिन दुर्गाकुंड स्थित दुर्गामंदिर में भक्तों की भारी भीड़ रही। मंदिर खुलने के पहले से लगी कतार चढ़ते दिन के साथ बढ़ती जा रही है।
पुराणों के अनुसार महत्व
देवी सहज ही प्रसन्न होकर भक्तों को सर्व सिद्धि प्रदान करती हैं। इसलिए शास्त्रों में देवी को सिद्धिदात्री नाम से पुकारा गया। शिव महापुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव को भी समस्त सिद्धियां माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही प्राप्त हुई थीं। दूसरी तरफ नवरात्र के अंतिम दिन दुर्गाकुंड स्थित दुर्गामंदिर में भक्तों की भारी भीड़ रही। मंदिर खुलने के पहले से लगी कतार चढ़ते दिन के साथ बढ़ती जा रही है।