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सेंट्रल जेल के कैदी को मिला गोल्ड मेडल
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Sun, 09 Aug 2015 01:58 AM IST
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सेंट्रल जेल शिवपुर में सजायाफ्ता अजीत कुमार सरोज ने इग्नू से ‘डिप्लोमा इन टूरिज्म स्टडीज’ में 75 फीसदी अंक हासिल कर गोल्ड मेेडल प्राप्त किया है। शनिवार को बीएचयू के केएन उडुप्पा सभागार में मुख्य अतिथि प्रो. जीसी जायसवाल उन्हें गोल्ड मेडल पहनाया तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। अजीत ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और खुशी का पल है। उन्होंने इग्नू को धन्यवाद दिया जिसकी वजह से आज वे इस मुकाम पर पहुंच पाए। अजीत ने बताया, अब सरकारी नौकरी तो मिल नहीं सकती, एमबीए कर किसी बड़ी कंपनी में ऊंचे ओहदे पर काम ही उनका लक्ष्य है। इस दौरान अजीत ने निर्दोष लोगों को जेल से मुक्त कराने की अपील की।
जलालपुर थाना क्षेत्र के चक्के गांव (जिला जौनपुर) के रहने वाले रामबचन का बेटे अजीत कुमार सरोज ने स्थानीय कुटीर इंटर कॉलेज से यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा पास करने के बाद कुटीर डिग्री कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष में दाखिला लिया था। अजीत ने बताया, सन 2010 में गांव के एक व्यक्ति की मौत में मुझे और मेेरे परिवारवालों को फर्जी ढंग से फंसा दिया गया। गैर इरादतन हत्या के
मामले में मुझे दस साल की सजा सुनाई गई। इसमें से चार साल की सजा काट चुका हूं। जेल में ही इग्नू से डिप्लोमा इन टूरिज्म स्टडी किया। इसमें जेल प्रशासन ने भी काफी सहयोग किया। इसके अलावा दो डिप्लोमा और चार सर्टिफिकेट कोर्स भी इग्नू से किया है। फिलहाल इग्नू से ही बीकॉम तृतीय वर्ष की पढ़ाई भी जारी है। इस दौरान परिवार के सदस्यों में मां सुशीला देवी, पिता रामबचन, बड़ी मां जामा देवी, बड़े पिता उमाशंकर, चाचा रामजतन, चाची गुड़िया, भाई अरविंद और भांजा अनमोल भी साथ में आया था।
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जलालपुर थाना क्षेत्र के चक्के गांव (जिला जौनपुर) के रहने वाले रामबचन का बेटे अजीत कुमार सरोज ने स्थानीय कुटीर इंटर कॉलेज से यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा पास करने के बाद कुटीर डिग्री कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष में दाखिला लिया था। अजीत ने बताया, सन 2010 में गांव के एक व्यक्ति की मौत में मुझे और मेेरे परिवारवालों को फर्जी ढंग से फंसा दिया गया। गैर इरादतन हत्या के
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मामले में मुझे दस साल की सजा सुनाई गई। इसमें से चार साल की सजा काट चुका हूं। जेल में ही इग्नू से डिप्लोमा इन टूरिज्म स्टडी किया। इसमें जेल प्रशासन ने भी काफी सहयोग किया। इसके अलावा दो डिप्लोमा और चार सर्टिफिकेट कोर्स भी इग्नू से किया है। फिलहाल इग्नू से ही बीकॉम तृतीय वर्ष की पढ़ाई भी जारी है। इस दौरान परिवार के सदस्यों में मां सुशीला देवी, पिता रामबचन, बड़ी मां जामा देवी, बड़े पिता उमाशंकर, चाचा रामजतन, चाची गुड़िया, भाई अरविंद और भांजा अनमोल भी साथ में आया था।
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