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छावनी उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा
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वाराणसी। सदस्याें के नाम वापस लेने व एक महिला सदस्य के अनुपस्थित रहने के चलते छावनी उपाध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। गुरुवार को बोर्ड के अध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया। कुर्सी बचाने के मामले में पूर्व उपाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह व सदस्य संगीता यादव की भूमिका को अहम माना जा रहा है।
इस बाबत मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिमन्यु सिंह ने बताया कि छावनी अधिनियम 2006 की धारा 20 (3) के अनुसार बैठक की कारवाई हुई जिसके अनुसार उपाध्यक्ष चंद्र केशव के खिलाफ दिया गया अविश्वास प्रस्ताव बोर्ड ने खारिज कर दिया। कुल मिलाकर तीन दिन की जद्दोजहद के बाद आखिरकार उपाध्यक्ष की कुर्सी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इस दौरान कुछ सदस्य अविश्वास प्रस्ताव के खेल के पीछे एक विधायक का हाथ होने का आरोप लगाते रहे।
उपाध्यक्ष चंद्र केशव के खिलाफ तीन दिन पहले बोर्ड के पांच सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का एक पत्र बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर हुकुम सिंह बैंसला को दिया था। इसको लेकर अध्यक्ष के आदेश पर गुरुवार को बोर्ड की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। इसको लेकर तीन दिन जोड़ तोड़ चलती रही। सभी की निगाहें इस बैठक पर थी। मसूदा हुसैन के अनुपस्थित रहने के चलते उपाध्यक्ष ने राहत की सांस ली।
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कारवाई शुरू होते ही सदस्य शहनवाज ने अविश्वास प्रस्ताव से अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद तो जैसे सिलसिला शुरू हो गया। शैलेंद्र सिंह व संगीता यादव ने भी शहनवाज अली का साथ दिया और नाम वापस ले लिया। अंदर मौजूद छ: में से चार सदस्यों का एक साथ मिलकर उपाध्यक्ष की कुर्सी बचा ली। जबकि मसूदा हुसैन के अनुपस्थित रहीं।
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इस बाबत मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिमन्यु सिंह ने बताया कि छावनी अधिनियम 2006 की धारा 20 (3) के अनुसार बैठक की कारवाई हुई जिसके अनुसार उपाध्यक्ष चंद्र केशव के खिलाफ दिया गया अविश्वास प्रस्ताव बोर्ड ने खारिज कर दिया। कुल मिलाकर तीन दिन की जद्दोजहद के बाद आखिरकार उपाध्यक्ष की कुर्सी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इस दौरान कुछ सदस्य अविश्वास प्रस्ताव के खेल के पीछे एक विधायक का हाथ होने का आरोप लगाते रहे।
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उपाध्यक्ष चंद्र केशव के खिलाफ तीन दिन पहले बोर्ड के पांच सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का एक पत्र बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर हुकुम सिंह बैंसला को दिया था। इसको लेकर अध्यक्ष के आदेश पर गुरुवार को बोर्ड की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। इसको लेकर तीन दिन जोड़ तोड़ चलती रही। सभी की निगाहें इस बैठक पर थी। मसूदा हुसैन के अनुपस्थित रहने के चलते उपाध्यक्ष ने राहत की सांस ली।
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कारवाई शुरू होते ही सदस्य शहनवाज ने अविश्वास प्रस्ताव से अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद तो जैसे सिलसिला शुरू हो गया। शैलेंद्र सिंह व संगीता यादव ने भी शहनवाज अली का साथ दिया और नाम वापस ले लिया। अंदर मौजूद छ: में से चार सदस्यों का एक साथ मिलकर उपाध्यक्ष की कुर्सी बचा ली। जबकि मसूदा हुसैन के अनुपस्थित रहीं।