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सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा: बीएचयू में 23 करोड़ की 10 मशीनें, ढाई साल में सिर्फ 163 दिन चलीं

Sat, 05 Oct 2024 11:32 AM IST
प्रगति चंद हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 05 Oct 2024 11:32 AM IST
सार

बीएचयू में 23 करोड़ की 10 मशीनें रखी गई हैं। जो ढाई साल में सिर्फ 163 दिन चली हैं। इसका खुलासा सीएजी की रिपोर्ट में हुआ है। 

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CAG report revealed 10 machines worth 23 crore in BHU worked only for 163 days in two and half years
बीएचयू के सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर में रखी गईं मशीनें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू के सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर में रखी गईं 23 करोड़ की 10 (इंस्ट्रूमेंट्स) मशीनें ढाई साल में औसतन छह महीने भी नहीं चलीं। ये खुलासा सीएजी की रिपोर्ट में हुआ है। 23.27 करोड़ की ये मशीनें 163 दिन ही चलीं। इस लिहाज से मशीनों का महज 22.52 प्रतिशत ही इस्तेमाल हुआ। 

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सीएजी ने माना है कि किसी भी मशीन के लिए ये इस्तेमाल बहुत कम है। रिपोर्ट में 2.12 प्वाइंट पर मशीनों को लेकर ये आपत्ति जताई गई है। सीएजी रिपोर्ट में फरवरी 2021 से जुलाई 2023 के बीच में सीडीसी में रखी गईं मशीनों के संचालन की जांच की गई।
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इस बीच 26.23 करोड़ की कुल 11 मशीनें खरीदी गईं। लेकिन, रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 10 मशीनों को औसतन 725 दिन तक रखा गया है, जबकि औसतन सिर्फ 163 दिन ही इस्तेमाल हुई है। जबकि, कुल 562 दिनों तक ये मशीनें चलीं ही नहीं। वहीं, एक मशीन ऐसी भी थी, जिसका इस्तेमाल 40 फीसदी से ज्यादा हुआ।

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हर महीने 175 घंटे चलनीं चाहिए मशीनें

CAG report revealed 10 machines worth 23 crore in BHU worked only for 163 days in two and half years
बीएचयू के सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर में रखी गईं मशीनों का इस्तेमाल - फोटो : अमर उजाला
नियम कहता है कि किसी भी लैब में एक महीने में 25 दिन और हर दिन सात घंटे मशीन का इस्तेमाल होना चाहिए। यानी कि हर महीने औसतन 175 घंटे मशीनें चलनीं चाहिए। जबकि, सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीडीसी में रखी गईं 10 मशीनें 5075 घंटे में से सिर्फ 1143 घंटे ही चलीं। रिपोर्ट की मानें तो, चार मशीनों का इस्तेमाल 2.7 से लेकर 7.7 फीसदी ही हुआ। पांच मशीनें 19 से 40 फीसदी चलीं। वहीं, दो मशीनों 40 फीसदी से ज्यादा इस्तेमाल हुआ। विज्ञान में माना जाता है कि जो मशीनें 40 प्रतिशत से ज्यादा चलती हैं, उनको ठीक माना जाता है। सीएजी ने अपनी इस रिपोर्ट इन आपत्तियों के नीचे ये भी लिखा है कि विश्वविद्यालय ने इस जांच का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।

मशीनें अब हर दिन चलेंगी

CAG report revealed 10 machines worth 23 crore in BHU worked only for 163 days in two and half years
बीएचयू स्थित सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर - फोटो : अमर उजाला
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कई मशीनें भले ही कम दिन चलीं हों, लेकिन अब सभी मशीनों के चलने के घंटों और उससे आने वाले रेवेन्यू को ध्यान में रखा जा रहा है। बीएचयू में 75 हजार रुपये का क्रेडिट दिया गया है। हर शिक्षक और शोधार्थी इतने रुपये तक मशीन का फ्री इस्तेमाल कर सकता है। मशीनें हर रोज चलें और उससे समाज और विश्वविद्यालय का कुछ फायदा हो, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है।
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