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...मगर बिहार में हिन्दुस्तान जीता है

Tue, 17 Nov 2015 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 17 Nov 2015 02:08 AM IST
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But in Bihar has won Hindustan ...

बेनियाबाग के इंडो-पाक मुशायरे में फ्रांस पर हुए आतंकी हमले के बाद विश्व समुदाय की बढ़ी चिंता से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी के बेहतरी के वादों तक को गीतों-गजलों से आइना दिखाने की कोशिश की गई।

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 शायरों ने बिहार चुनाव में हार पर तंज भी कसे, चुटकी भी ली। महंगाई, नफरतों की खड़ी होती दीवार तोड़ने के संदेश के साथ रात भर शेरो-शायरी का दौर तालियों के शोर और ठहाकों के बीच चला।
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की याद में आयोजित इंडो-पाक मुशायरे में कुवैत, दुबई, नेपाल के भी शायरों ने शिरकत की।
आधी रात के बाद मुद्दों पर गजलों के बहार-ए-दौर का सिलसिला बढ़ा तो भीड़ से भरे बेनियाबाग के मैदान में एक-एक मिसरे पर शायरों को नवाजा जाने लगा।
 मुशायरे की नवाजत कर रहे नदीम फर्रुख ने शायरा शबीना अदीब को आवाज दी। उन्होंने आतंकवाद के पीछे की हकीकत भी बयां करने की कोशिश की। उन्होंने शेर पढ़ा-आसान भी तुम्ही हो एतबार भी भी तुम्हीं हो/एलान कर रहे हो आतंक खत्म होगा/आतंकवादियों के सरदार भी तुम्हीं हो...।
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 दुनिया को अपनी शान दिखा दी बिहार ने/कश्ती अदावतों जला दी बिहार ने...। इनसे पहले शाइस्ता सना ने मोहब्बत के पैगाम से माहौल बदला। उन्होंने पढ़ा-कोई न जाने जिगर ऐसा काम कर जाना/नजर से होते हुए दिल में तुम उतर जाना/तुम्हारे दिल के इशारे को मैं समझ लूंगी/बस इतना करना कि हंसते हुए गुजर जाना...।
कोलकाता से आई शायरा उरूसा आरसी ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई को अर्ज करते हुए कुछ मिसरे इस तरह पढ़े। तारीफ का हिस्सा है शहनाई बनारस की/इस फन में हुई दुनिया सादाई बनारस की..।
 इनके बाद नदीम नैयर की आमद हुई। उन्होंने बिहार चुनाव नतीजों से शुरुआत की। उनके शेर थे कि- न जमीन जीती न आसमान जीता है/ए बात सच है कि संविधान जीता है/तमाम मुल्क में फिरकापरस्त जीते हैं/मगर बिहार में हिंदुस्तान जीता है...।
 इस उन्होंने खूब तालियां बटोरीं। फिर उस्मान मीनाई ने अपने तीखे शेरों से हंगामे जैसा माहौल खड़ा कर दिया। सियासी माहौल पर उन्होंने चुन-चुन कर तीर चलाए।
उनके कुछ शेर देखिए-झूठ का खेल जो होता कभी ओलंपिक में/अपना फेकू भी सोने का पदक पा जाता...। इस बार अपना वोट तुम्हें हरगिज नहीं दूंगा/इस बार मैं अपना बदन किसी और से डसवाऊंगा...।

इनके अलावा कुवैत से आए अफरोज आलम, दुबई के डॉ. जुबेर फारुख अलअर्सी, नेपाल के जाहिद आजाद, जौहर कानपुरी, हाशिम फिरोजाबादी, राही बस्तवी ने गजलें पढ़ीं। 

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