Varanasi : छात्रा से छेड़खानी में कंडक्टर को जेल, स्कूल में बढ़ाई गई सुरक्षा, तीन आरोपियों के खिलाफ जांच जारी
वाराणसी के तरना ब्यास बाग स्थित निजी स्कूल में एलकेजी की छात्रा से छेड़छाड़ के आरोपी कंडक्टर ज्ञानेंद्र सिंह को जेल भेज दिया गया। वहीं, एक अन्य आरोपी कंडक्टर स्वामीनाथ की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वाराणसी के तरना ब्यास बाग स्थित निजी स्कूल में एलकेजी की छात्रा से छेड़छाड़ के आरोपी कंडक्टर ज्ञानेंद्र सिंह को जेल भेज दिया गया। वहीं, एक अन्य आरोपी कंडक्टर स्वामीनाथ की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। स्कूल प्रबंधन ने कर्मचारियों को बाहरी लोगों से बातचीत पर प्रतिबंध लगा दिया है। बड़ागांव पुलिस के अनुसार स्कूल प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट इंचार्ज के भूमिका की भी जांच की जा रही है।
लालपुर-पांडेयपुर क्षेत्र के रहने वाले पिता ने स्कूल प्रबंधन, ट्रांसपोर्ट इंचार्ज, दोनों कंडक्टर के खिलाफ छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कराया है। इस आधार पर पुलिस ने बुधवार को ही शिवपुर निवासी कंडक्टर ज्ञानेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया था, जबकि अन्य कंडक्टर स्वामीनाथ फरार है। बड़ागांव थाना प्रभारी निरीक्षक अश्वनी चतुर्वेदी के अनुसार तीन और आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है।
यहां बता दें कि इसी स्कूल में कुछ महीने पहले रूट नंबर छह पर चलने वाली एक बस में उमरहा निवासी कंडक्टर ने शहर की छात्रा से छेड़खानी का प्रयास किया गया था। आरोप तो यहां तक था कि कंडक्टर ने छात्रा को जबरन अपना मोबाइल नंबर दिया था और बात करने का दबाव भी बना रहा था। परिजनों की ओर से स्कूल प्रबंधन को शिकायत किए जाने के बाद बस चालक और कंडक्टर को मारपीट कर निकाल दिया था।
नियम ताक पर रख निजी वाहनों से ढोये जा रहे स्कूली बच्चे
निजी स्कूल प्रबंधनों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर निजी वाहनों से स्कूली बच्चे ढोए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक नियमों के प्रति जागरूक नहीं हैं। ऐसे में स्कूल संचालकों द्वारा मनमानी की जा रही है। बड़ागांव थाना अंतर्गत कोईराजपुर, हरहुआ, भगतुपुर, बैजलपट्टी, सेहमलपुर, भेलखा सहित अन्य स्थानों पर हरहुआ क्षेत्र के चुनिंदा निजी विद्यालयों के बाहर बच्चों को लेकर आने वाले निजी वाहन खड़े रहते हैं।
स्कूल की छुट्टी होने के बाद उन्हीं वाहनों से बच्चों को घर पहुंचाया जाता है। कुछ ऐसे भी स्कूल संचालक हैं, जो बच्चों के लिए निजी वाहनों का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। अधिकतर स्कूलों में जो बसें लगाई गई हैं, उनमें न तो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और न ही उस पर लिखे नंबर पर संपर्क हो पाता है।