{"_id":"664f1956446295ad2e011f1e","slug":"buddha-purnima-2024-moolgandh-kuti-vihar-temple-built-on-remains-of-buddha-2024-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Buddha Purnima 2024: बुद्ध के अस्थि अवशेष पर बना है मूलगंध कुटी विहार, 1932 में हुआ था इस मंदिर का निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Buddha Purnima 2024: बुद्ध के अस्थि अवशेष पर बना है मूलगंध कुटी विहार, 1932 में हुआ था इस मंदिर का निर्माण
Thu, 23 May 2024 03:56 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Thu, 23 May 2024 03:56 PM IST
सार
Buddha Purnima 2024 : भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के ऊपर वर्ष 1932 में मूलगंध कुटी विहार मंदिर का निर्माण किया गया था। यह दुनिया भर के बौद्ध धर्मावलियों की आस्था का केंद्र है। भगवान बुद्ध ने यहीं पर पांच शिष्यों को सबसे पहला उपदेश दिया था।
विज्ञापन
सारनाथ मूलगंध कुटी विहार।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तथागत की प्रथम उपदेश स्थली देश ही नहीं दुनिया भर के बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। भगवान बुद्ध ने ज्ञान की प्राप्ति के बाद यहीं पर पांच शिष्यों को सबसे पहला उपदेश दिया था। मूलगंध कुटी विहार मंदिर का निर्माण भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के ऊपर किया गया था। बुद्ध पूर्णिमा पर देश और दुनिया भर के श्रद्धालु सारनाथ पहुंचे हैं।
विज्ञापन
महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव भिक्षु सुमितानंद थेरो ने बताया कि 1932 में मूलगंध कुटी विहार मंदिर का निर्माण भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के ऊपर किया गया था। इस अस्थि अवशेष का एक छोटा सा भाग मंदिर में दर्शन के लिए रखा गया है। इसे विशेष विधि से संरक्षित करके रखा गया है। साल में दो बार आम श्रद्धालुओं के लिए अस्थि कलश दर्शन के लिए रखे जाते हैं।
विज्ञापन
वैशाख पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर भक्त अस्थि कलश के दर्शन करते हैं। ब्रिटिश शासन काल में पुरातात्विक सर्वेक्षण कर रहे सर जॉन मॉर्शल और जनरल अलेक्जेंडर कनिंघम ने तक्षशिला में स्थित धातु स्तूप से प्राप्त भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष को अनागरिक धर्मपाल को दिया गया था। इसी पर यह मंदिर निर्मित किया गया है। अनागरिक धर्मपाल ने ही महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया की स्थापना भी की थी।
विज्ञापन