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UP Politics: पूर्वांचल में 5 पिछड़े और 3 अगड़ों को BSP ने दिया टिकट, जानें- क्या है सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला

Fri, 19 Apr 2024 12:54 PM IST
अमन विश्वकर्मा राहुल दुबे, अमर उजाला, वाराणसी
राहुल दुबे, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 19 Apr 2024 12:54 PM IST
सार

UP Politics: बसपा ने 2019 का चुनाव सपा के साथ गठबंधन में लड़ा। इस चुनाव में बसपा ने वाराणसी, चंदौली, बलिया, आजमगढ़, मिर्जापुर और रॉबट् र्सगंज में प्रत्याशी नहीं उतारे थे। यहां सपा के प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था।

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BSP gave tickets to five backward and three forward candidates in Purvanchal
सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बसपा ने साल 2007 के विधानसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग के जरिये अप्रत्याशित रूप से सत्ता हासिल कर ली थी। 2009 में इसी के सहारे उप्र से 20 सांसद चुने गए थे और पूर्वांचल से पांच सांसद दिल्ली पहुंचे थे। अब एक बार फिर बसपा ने इसी फार्मूले से ताल ठोंक दी है। 

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अभी तक जिन दस सीटों पर प्रत्याशी दिए हैं, उसमें तीन अगड़े, पांच पिछड़े, एक मुस्लिम और एक एससी-एसटी का प्रत्याशी शामिल है। सियासी गलियारों में इसीलिए चर्चा है कि पार्टी इससे अगड़े-पिछड़े-मुस्लिम मतदाताओं में एकजुटता का संदेश दे रही है।
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पिछले कुछ चुनावों पर गौर करें तो पूर्वांचल की कई सीटों पर बसपा की स्थिति अच्छी रही है। 2009 में अकेले दम पर बसपा ने पूर्वांचल की 13 सीटों में से पांच सीटों पर जीत हासिल की थी और 2019 में सपा के साथ गठबंधन में चार सीटें जीती थीं। मगर इस बार बसपा अकेले ही चुनाव मैदान में हैं। 
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अभी तक प्रचार का नेतृत्व भी बसपा सुप्रीमो मायावती करती थीं मगर इस बार कमान उनके भतीजे आकाश आनंद संभाले हुए हैं। ऐसे में बसपा के सामने यह चुनौती होगी कि 2019 का जनाधार भी बनाए रखे और 2009 का प्रदर्शन भी दोहरा सके। लोकसभा चुनाव में बसपा ने सबसे अच्छा प्रदर्शन तब किया था जब प्रदेश में उसकी सरकार थी। 

बसपा ने 2009 में 20 सीटों पर जीत हासिल की थी। पूर्वांचल की 13 सीटों में पांच पर जीती थी और कई सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। 2014 लोकसभा में बसपा फिर एक बार फिर अकेले ही मैदान में आई मगर उस समय मोदी लहर में एक भी सीट उसके हिस्से नहीं आ सकी। 2019 के चुनाव में बसपा ने सपा के साथ गठबंधन किया और पूर्वांचल की सात सीटों पर प्रत्याशी उतारे और चार में जीत दर्ज की। वहीं मछलीशहर सीट मात्र 181 वोट से बसपा ने गंवा दी थी।

2019 में जीती सीटें : लालगंज, जौनपुर, घोसी, गाजीपुर

पिछले तीन चुनाव में बसपा का प्रदर्शन
वाराणसी

2019 - प्रत्याशी नहीं
2014 - 60,579
2009 - 1,85,911

चंदौली
2019 - प्रत्याशी नहीं 2014 - 2,57,379
2009 - 1,79,655

भदोही
2019 - 4,66,414
2014 - 2,45,554
2009 - 1,95,808 -जीती

गाजीपुर
2019 - 5,66,082 - जीती
2014 - 2,41,645
2009 - 3,09,924

बलिया
2019 - प्रत्याशी नहीं
2014 - 1,41,684
2009 - 2,04,094

आजमगढ़
2019 - प्रत्याशी नहीं
2014 - 2,66,528
2009 - 1,98,609

लालगंज
2019 - 5,18,820 - जीती
2014 - 2,33,971
2009 - 2,07,998 - जीती

जौनपुर
2019 - 5,00543 -जीती
2014 - 2,20,839
2019 - 3,02,618 - जीती

मिर्जापुर
2019 -प्रत्याशी नहीं
2014 - 2,17,457
2009 - 1,99,216

घोसी
2019 - 5,73,829 - जीती
2014 - 2,33,782
2009 - 2,20,695 - जीती

रॉबटर्सगंज
2019 - प्रत्याशी नहीं
2014 - 1,87,725
2009 - 1,66,219

मछलीशहर
2019 - 4,88,216
2014 - 2,66,055
2009 - 1,98,846

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