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ब्रिगेडियर उस्मान ने तोड़ा था दुश्मन का हौसला

Sat, 03 Jul 2021 01:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 01:27 AM IST
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Brigadier Usman had broken the spirit of the enemy
भारत-पाक की लड़ाई में नौशेरा का शेर कहे जाने वाले बिग्रेडियर उस्मान ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। उनकी वीरता के दम पर भारतीय सेना ने झागड़ और नौशेरा पर दोबारा कब्जा जमाया था। यह अलग बात है कि इस जंग में गंभीर रूप से घायल ब्रिगेडियर उस्मान तीन जुलाई 1948 को वीरगति को प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्रप्रदान किया।
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हरिश्चंद्र महाविद्यालय के भारतेंदु पुरातन छात्र एसोसिएशन के सचिव डॉ. प्रभाकर ने बताया कि अक्तूबर 1947 में पाकिस्तानी सेना ने वेश बदलकर जम्मू कश्मीर में आक्रमण किया तो ब्रिग्रेडियर उस्मान ने ऐसा पराक्रम दिखाया था कि उन्हें नौशेरा के शेर का खिताब दिया गया था। आजमगढ़ के बहादुर मो. फारुख समृद्ध एवं जमींदार घराने के थे। वह वाराणसी में कोतवाल थे। उनके तीन पुत्र थे। सबसे बड़े मो. सुबहान, दूसरे बिग्रेडियर उस्मान ओर तीसरे मो. गुफरान भारतीय सेना में अधिकारी थे। भारत-पाक विभाजन के दौरान पाकिस्तान ने दोनों भाइयों को सेना में प्रोन्नत करने का लालच देकर पाकिस्तानी सेना में शामिल होने का आमंत्रण दिया पर दोनों भाइयों ने इसको ठुकरा दिया। सुबहान एवं ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान दोनों ही अविवाहित थे। मो. उस्मान 1926-27 में हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज के छात्र थे। कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की मंशा लिए पाकिस्तान भारतीय सेना में भी फूठ डालना चाहता था। मगर, पूर्वांचल की माटी के उस्मान ने पाकिस्तान जाने से साफ मना कर दिया। मोहम्मद उस्मान भारत की आजादी के महज 11 महीने बाद पाकिस्तानी घुसपैठियों से जंग करते हुए 3जुलाई को शहीद हो गए। उनके अंतिम शब्द थे, मैं जा रहा हूं लेकिन उस इलाके को दुश्मन के कब्जे में न जाने दें जिसके लिए हम लड़ रहे थे।
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यह उल्लेखनीय है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी कैबिनेट के सहयोगी उनकी अंत्येष्टि में शामिल हुए। यह वह सम्मान है जो इसके बाद किसी भारतीय फौजी को नहीं मिला। इनके अलावा अंतिम यात्रा में गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन, केंद्रीय मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद और शेख अब्दुल्ला भी थे।
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जन्म-15 जुलाई 1912
जन्म भूमि-आजमगढ़ (अब जन्मस्थान मऊ जिले का बीबीपुर गांव में हो गया है)
मृत्यु- 3 जुलाई 1948
मृत्यु स्थान-जम्मू
पुरस्कार-उपाधि महावीर चक्र
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