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सत्ताधारियों ने उड़ाईं जेल नियमों की धज्जियां
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Apr 2016 01:55 AM IST
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रविवार को जेल के अंदर का माहौल गरम था तो सोमवार को जेल के बाहर का। कारागार मंत्री के साथ आए सपाइयों ने पुलिस से जमकर जोरआजमाइश की। सपाई जबर्दस्ती जेल में घुसना चाहते थे और पुलिस उन्हें रोक रही थी। मामला सत्ताधारी दल का था तो पुलिस ने भी हार मान ली और सपाई जेल नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए जेल में घुस गए। बाहर जो खड़े रह गए उन्होंने अंदर जाने से रोकने पर हंगामा खड़ा कर दिया।
कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया के जिला जेल पहुंचने से पहले ही सपा नेताओं का जमावड़ा लग गया था। कारागार मंत्री ने कहा कि उनके साथ सपा के जिलाध्यक्ष सतीश फौजी व महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, रीबू श्रीवास्तव और यूपी जेल एसोसिएशन की अध्यक्ष हर्षिता मिश्रा ही भीतर जाएंगी। मंत्री के साथ होने के कारण सत्ताधारी दल के नेताओं की तलाशी लेने की हिम्मत जेलकर्मी नहीं कर सके। साथ ही किसी ने यह भी कहने की हिम्मत नहीं जुटाई कि सभी नेता अपना मोबाइल बाहर ही रखकर जाएं। वहीं मंत्री के साथ जो नेता जेल के भीतर नहीं जा सके वे जबरदस्ती पर उतारू हो गए और पुलिस से धक्कामुक्की कर अंदर घुसने लगे। हालांकि पुलिस ने दम दिखाते हुए जेल का गेट अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद भी सपा नेता काफी देर तक जेल के गेट के पास भीड़ लगाए रहे और खटखटाकर अंदर बुलाए जाने की गुहार लगाते रहे।
सर्किट हाउस में कारागार मंत्री से पत्रकारों ने जब पूछा कि आखिरकार सपा नेता किस कानून और जेल मैनुअल के तहत मोबाइल जेल के अंदर ले गए ? जेल जैसे गोपनीय और अतिसंवेदनशील स्थान पर शासन और प्रशासन के प्रतिनिधियों के अलावा आमजन बिना तलाशी के कैसे प्रवेश किए, वह भी तब जबकि उन्हें किसी बंदी से भी नहीं मिलना था ? इन सवालों पर कारागार मंत्री ने पहले तो चुप्पी साध ली। काफी कुरेदे जाने पर गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि ‘नहीं ऐसा नहीं हैं जी, देखेंगे जी। पहले हमारी सुनिए तो जी, हम यहां बहुत गंभीर मसले पर बात करने आए हैं। आप 15 लोग एक साथ सवाल पूछेंगे तो मैं अकेला कहां से जवाब दूंगा जी। जरूरी बातें सुन लीजिए जी, फिर हम इस पर भी बात करेंगे जी।’
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कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया के जिला जेल पहुंचने से पहले ही सपा नेताओं का जमावड़ा लग गया था। कारागार मंत्री ने कहा कि उनके साथ सपा के जिलाध्यक्ष सतीश फौजी व महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, रीबू श्रीवास्तव और यूपी जेल एसोसिएशन की अध्यक्ष हर्षिता मिश्रा ही भीतर जाएंगी। मंत्री के साथ होने के कारण सत्ताधारी दल के नेताओं की तलाशी लेने की हिम्मत जेलकर्मी नहीं कर सके। साथ ही किसी ने यह भी कहने की हिम्मत नहीं जुटाई कि सभी नेता अपना मोबाइल बाहर ही रखकर जाएं। वहीं मंत्री के साथ जो नेता जेल के भीतर नहीं जा सके वे जबरदस्ती पर उतारू हो गए और पुलिस से धक्कामुक्की कर अंदर घुसने लगे। हालांकि पुलिस ने दम दिखाते हुए जेल का गेट अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद भी सपा नेता काफी देर तक जेल के गेट के पास भीड़ लगाए रहे और खटखटाकर अंदर बुलाए जाने की गुहार लगाते रहे।
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सर्किट हाउस में कारागार मंत्री से पत्रकारों ने जब पूछा कि आखिरकार सपा नेता किस कानून और जेल मैनुअल के तहत मोबाइल जेल के अंदर ले गए ? जेल जैसे गोपनीय और अतिसंवेदनशील स्थान पर शासन और प्रशासन के प्रतिनिधियों के अलावा आमजन बिना तलाशी के कैसे प्रवेश किए, वह भी तब जबकि उन्हें किसी बंदी से भी नहीं मिलना था ? इन सवालों पर कारागार मंत्री ने पहले तो चुप्पी साध ली। काफी कुरेदे जाने पर गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि ‘नहीं ऐसा नहीं हैं जी, देखेंगे जी। पहले हमारी सुनिए तो जी, हम यहां बहुत गंभीर मसले पर बात करने आए हैं। आप 15 लोग एक साथ सवाल पूछेंगे तो मैं अकेला कहां से जवाब दूंगा जी। जरूरी बातें सुन लीजिए जी, फिर हम इस पर भी बात करेंगे जी।’
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