Politics: वाराणसी के DCF पर 45 साल बाद खिला कमल, राकेश बने सभापति और प्रमोद उपसभापति
Politics: जिला सहकारी फेडरेशन के इस चुनाव में काफी गहमागहमी रही। सभापति और उपसभापति के साथ ही पन्नालाल यादव यूपीएसएस, अभिषेक पांडेय इफ्को नई दिल्ली, धर्मेंद्र रघुवंशी यूपी प्रक्रियात्मक सहकारी संघ नई दिल्ली, शैलेंद्र श्रीवास्तव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और गिरीश पांडेय शीतगृह राजातालाब के लिए प्रतिनिधि चुने गए।
विस्तार
वाराणसी में जिला सहकारी फेडरेशन (डीसीएफ) पर पहली बार भाजपा कब्जा करने में कामयाब हो गई। गुरुवार को सभापति और उपसभापति पद के लिए हुए चुनाव में उम्मीदवार न मिलने पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी राकेश कुमार सिंह ‘अलगू’ सभापति और प्रमोद कुमार उपसभापति निर्विरोध निर्वाचित हुए। इससे पहले 45 साल से इन पदों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा था।
गुरुवार को डीसीएफ के सभापति पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राकेश कुमार सिंह ‘अलगू’ निर्विरोध सभापति चुने गए। प्रमोद कुमार उपसभापति और जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन आरपी कुशवाहा, नेफेड (नई दिल्ली) के प्रतिनिधि चुने गए। पन्नालाल यादव यूपीएसएस, अभिषेक पांडेय इफ्को नई दिल्ली, धर्मेंद्र रघुवंशी यूपी प्रक्रियात्मक सहकारी संघ नई दिल्ली, शैलेंद्र श्रीवास्तव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और गिरीश पांडेय शीतगृह राजातालाब के लिए प्रतिनिधि चुने गए।
निर्वाचन अधिकारी व अपर नगर मजिस्ट्रेट तृतीय आनंद मोहन ने निर्वाचित पदाधिकारी को प्रमाण पत्र दिया। सचिव अवधेश सिंह ने बताया कि परिणामों की घोषणा के बाद सभापति की अध्यक्षता में नवनिर्वाचित संचालकों और शासन से मनोनीत संचालकों की बैठक हुई। इस मौके पर एमएलसी व भाजपा जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, विधायक अवधेश सिंह, चेतनारायण सिंह, अरुण सिंह, सोमनाथ विश्वकर्मा, सुजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
गुजरात मॉडल पर होगा विकास
नवनिर्वाचित सभापति राकेश सिंह ‘अलगू’ ने कहा कि डीसीएफ में अब कमल खिल चुका है। यहां पर गुजरात मॉडल की तर्ज पर विकास कराया जाएगा। नए सिरे से विकास करने के लिए काम शुरू जाएगा।
आधी सदी से था लक्ष्मी प्रसाद राय और उनके परिवार का कब्जा
डीसीएफ पर लगभग आधी सदी तक समाजवादी पार्टी के लक्ष्मी प्रसाद राय और उनके परिवार का कब्जा रहा। उनके कार्यकाल में कुछ सदस्य मतदाता नहीं बनाए गए थे। उन्होंने कोर्ट में आपत्ति दाखिल की। कोर्ट ने नए सदस्यों को जोड़ने का आदेश दिया। इस वजह से बीच में चुनाव लटक गए। प्रशासन की ओर से चुनाव कराने के लिए प्रबंध समिति बनाई गई, जिसमें सरकारी अधिकारी प्रशासक बनाए गए। इसके बाद चुनाव संपन्न कराया गया।