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टिकट 'संग्राम': पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में नया ट्रंप कार्ड खेल सकती है भाजपा
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 05 Feb 2017 12:20 AM IST
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शहर दक्षिणी के अंदरुनी घमासान को थामने के लिए भाजपा तीर साधने के मूड में
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी क्षेत्र में टिकट बंटवारे के बाद अंतर्कलह से जूझ रही भाजपा अंदरूनी घमासान रोकने के लिए नया ट्रंप कार्ड पिंडरा विधानसभा क्षेत्र में खेल सकती है। शहर दक्षिणी सीट को लेकर उभरे अंतर्विरोध की आंच को ठंडा करने के लिए भाजपा इस सीट से दयाशंकर मिश्र दयालु को उम्मीदवार बना सकती है। पार्टी को इस सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार की तलाश भी रही है।
भाजपा रणनीतिकारों के बीच इस नए समीकरण को लेकर दिन भर चर्चा गर्म रही। उधर, अपना दल और भासपा भी दयालु के रास्ते में कांटा हैं।इन दोनों दलों की कोशिश है कि पिंडरा उनके खाते में आ जाए।
दो बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके दयालु शहर दक्षिणी से ही भाजपा में टिकट के दावेदार रहे हैं।
वर्ष 2014 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन उन्होंने इसी उम्मीद पर थामा था कि उन्हें विस चुनाव में दक्षिणी से पार्टी उम्मीदवार बनाएगी।
अब विधायक श्याम देव राय चौधरी दादा के रिटायर होने के बाद जब भाजपा ने दयालु को दक्षिणी से टिकट नहीं दिया तब वहां घमासान शुरू हो गया है।
भाजपा गठबंधन में शामिल तीनों दलों के दावेदार टिकट हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं।
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भाजपा रणनीतिकारों के बीच इस नए समीकरण को लेकर दिन भर चर्चा गर्म रही। उधर, अपना दल और भासपा भी दयालु के रास्ते में कांटा हैं।इन दोनों दलों की कोशिश है कि पिंडरा उनके खाते में आ जाए।
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दो बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके दयालु शहर दक्षिणी से ही भाजपा में टिकट के दावेदार रहे हैं।
वर्ष 2014 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन उन्होंने इसी उम्मीद पर थामा था कि उन्हें विस चुनाव में दक्षिणी से पार्टी उम्मीदवार बनाएगी।
अब विधायक श्याम देव राय चौधरी दादा के रिटायर होने के बाद जब भाजपा ने दयालु को दक्षिणी से टिकट नहीं दिया तब वहां घमासान शुरू हो गया है।
भाजपा गठबंधन में शामिल तीनों दलों के दावेदार टिकट हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं।
दादा और दयालु खेमे से नुकसान की आशंका
दादा के घर पहुंचे केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
दक्षिणी में भाजपा को एक तरफ दादा के समर्थकों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है तो दूसरी ओर दयालु खेमे से भी नुकसान की आशंका सता रही है। माना जा रहा है कि अगर दयालु को टिकट नहीं मिला तो वह निर्दल उम्मीदवार के रूप में दक्षिणी से पर्चा भर सकते हैं, जो भाजपा के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में पार्टी अपने पांव में चुभे नाराजगी के कांटे को बहुत सलीके से निकालने की तैयारी में है।
पिंडरा से पांच बार के विधायक अजय राय फिर कांग्रेस से चुनाव मैदान में हैं।
बसपा ने बाबूलाल पटेल को प्रत्याशी घोषित किया है। इस बीच भाजपा गठबंधन के कदम का दूसरे दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बेसब्री से इंतजार है। भाजपा गठबंधन में शामिल तीनों दलों के दावेदार टिकट हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं।
भाजपा से अवधेश सिंह, रजनीकांत मिश्र, राजेश दीक्षित और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संकठा पटेल दावेदार हैं, जबकि अपना दल से सुनील पटेल ने दावा पेश किया है। वहीं, भासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का पैतृक गांव भी इसी क्षेत्र में है।
पिंडरा से पांच बार के विधायक अजय राय फिर कांग्रेस से चुनाव मैदान में हैं।
बसपा ने बाबूलाल पटेल को प्रत्याशी घोषित किया है। इस बीच भाजपा गठबंधन के कदम का दूसरे दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बेसब्री से इंतजार है। भाजपा गठबंधन में शामिल तीनों दलों के दावेदार टिकट हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं।
भाजपा से अवधेश सिंह, रजनीकांत मिश्र, राजेश दीक्षित और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संकठा पटेल दावेदार हैं, जबकि अपना दल से सुनील पटेल ने दावा पेश किया है। वहीं, भासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का पैतृक गांव भी इसी क्षेत्र में है।