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बीएचयू अस्पतालः ‘अंदर’ दवा का भाव सुनकर हड़बड़ाया, दौड़कर बाहर से ले आया

Thu, 27 Dec 2018 11:56 AM IST
shashikant misra न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: shashikant misra Updated Thu, 27 Dec 2018 11:56 AM IST
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Big differences medicine rate in BHU hospital
दवा एक ही है, मगर दामों में अंतर इतना कि जो भी सुने चौंक जाए। कैंसर से पीड़ित बिहार के एक मरीज के साथ भी ऐसा ही हुआ। बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल में इलाज करा रहा यह मरीज कीमोथेरेपी के लिए दवा लेने परिसर स्थित फार्मेसी पहुंचा।
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उसे दवा की कीमत 55 हजार रुपये बताई गई। यह सुनकर वह हड़बड़ा गया। बाहर निकलकर एक मेडिकल भाव पता किया तो दवा सिर्फ 16 हजार रुपये में मिल रही थी। मरीज ने इसकी शिकायत इलाज कर रहे डॉक्टर से की तो रेडियोथेरेपी विभाग के एक रेजीडेंट ने इसकी शिकायत चिकित्सा अधीक्षक को पूरी बात बताई।
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इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हो गई। मंगलवार को फार्मेसी संचालक को बुलाकर पूछताछ भी की गई। बिहार के भटनहिया निवासी कैंसर के मरीज ने पहले क्षमता के अनुसार इलाज कराया। जब आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी तो मुख्यमंत्री से मदद के लिए गुहार लगाई।
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विवेकाधीन कोष से उसे एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि मिली। उसका इलाज बीएचयू के रेडियोथेरेपी विभाग के एक डॉक्टर के निर्देशन में चल रहा है। डॉक्टर ने उसे कीमोथेरेपी की सलाह दी। इसके लिए जब वह दवा लेने परिसर स्थित फार्मेसी पर पहुंचा तो उसे इसकी कीमत 55 हजार रुपये बताई गई। 

सरकारी रुपये के लिए पूरा खेल

कैंसर जैसी भयानक बीमारी से लड़ रहे मरीजों को सस्ते दाम पर दवा मिल सके इसके लिए योजनाएं चलाने के साथ ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से एक से दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता भी दी जाती है। हालांकि इसका पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पाता है। कारण यह कि इसकी मानीटरिंग नहीं हो पाती है।

जिस मरीज को मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री राहत कोष से इलाज के लिए धन मिलता है, वह संबंधित अस्पताल के खाते में आता है। यहां से मरीज के इलाज, जांच, दवा आदि में जो भी खर्च होते हैं, उसका भुगतान अस्पताल प्रशासन की ओर से किया जाता है। कब कितना खर्च हुआ और उस राशि में कितना धन शेष है, इसकी जानकारी अगर मरीज और परिजन चाहें तो उन्हें दी जाती है। लेकिन आमतौर पर मरीज इसकी जानकारी हासिल नहीं करते हैं।

चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि रेडियोथेरेपी विभाग की ओर से मिले शिकायती पत्र में अमृत फार्मेसी में कीमोथेरेपी की दवा के दाम 55 हजार और बाहर 16 हजार रुपये में मिलने का जिक्र है। मामले की जांच कराई जा रही है, जिससे असलियत का पता चल सके कि आखिर क्या मामला है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
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