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शताब्दी वर्ष में सौ गांवों को साक्षर बनाएगा बीएचयू
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 27 Apr 2016 02:10 AM IST
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के साक्षी बनारस के गांव भी बनेंगे। बीएचयू ने बनारस के सौ गांवों को गोद लेकर साक्षर और स्वस्थ बनाने का बीड़ा उठाया है। इस अभियान का उद्देश्य युवा पीढ़ी को गांवों से जोड़ना है। छात्र-छात्राएं गांवों से जुड़ेंगे तो वहां की हकीकत से रूबरू होंगे। विश्वविद्यालय चाहता है कि विद्यार्थी गांवों और वहां रहने वालों की समस्याएं जाने और उसका समाधान तलाशें। इसी बहाने गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलेगी।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने मंगलवार को ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में बताया कि बीएचयू के शताब्दी वर्ष पर गांवों में साक्षरता और स्वास्थ्य के मद्देनजर कार्य करने की योजना तैयार की गई है। विश्वविद्यालय के आसपास सौ गांवों को चिह्नित किया जाएगा। इस योजना के तहत विश्वविद्यालय के विद्यार्थी गांव जाएंगे।
गांव के बच्चों के साथ ही ऐसी महिलाओं व बुजुर्गों को शिक्षा से जोड़ने का काम करेंगे जो कभी स्कूल न गए हों। गांव के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ उन्हें साक्षर करेंगे। इसी तरह सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सकों की टीम समय समय पर गांवों में जाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ उन्हें स्वास्थ्य और स्वच्छता से जोड़ेगी। इस अभियान को बाकायदा पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। कोर्स और कंटेंट तैयार किए जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी सभी संकाय प्रमुख व विभागाध्यक्षों को दी जाएगी।
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बीएचयू अब अपने विद्यार्थियों को संस्कार की भी शिक्षा देगा। खासकर हास्टल में रहने वाली छात्राओं से संवाद और उनकी मुकम्मल सुरक्षा के लिए विश्वविद्यालय ने काउंसलिंग एंड गाइडेंस सेल गठित किया है। इस सेल में विश्वविद्यालय की सीनियर महिला प्रोफेसरों के अलावा समाज के अन्य क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं को भी रखा गया है। घर परिवार से दूर विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं की समय-समय पर काउंसलिंग के लिए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने इस सेल का गठन किया है।
छात्राओं के साथ संवाद और सामंजस्य स्थापित करना और उनका मार्गदर्शन करना इस सेल का प्रमुख उद्देश्य है। सेल के सदस्य समय-समय पर हॉस्टल में जाकर छात्र-छात्राओं से बातचीत करेंगे। उनकी व्यक्तिगत शिकायतें सुनेंगे और संकाय स्तर पर डीन उसका समाधान करेंगे। समस्या जटिल होने पर विश्वविद्यालय के आला अधिकारी इस मामले को देखेंगे और उसे निस्तारित कराएंगे। यही व्यवस्था छात्रों के लिए भी है।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने मंगलवार को ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में बताया कि बीएचयू के शताब्दी वर्ष पर गांवों में साक्षरता और स्वास्थ्य के मद्देनजर कार्य करने की योजना तैयार की गई है। विश्वविद्यालय के आसपास सौ गांवों को चिह्नित किया जाएगा। इस योजना के तहत विश्वविद्यालय के विद्यार्थी गांव जाएंगे।
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गांव के बच्चों के साथ ही ऐसी महिलाओं व बुजुर्गों को शिक्षा से जोड़ने का काम करेंगे जो कभी स्कूल न गए हों। गांव के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ उन्हें साक्षर करेंगे। इसी तरह सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सकों की टीम समय समय पर गांवों में जाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ उन्हें स्वास्थ्य और स्वच्छता से जोड़ेगी। इस अभियान को बाकायदा पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। कोर्स और कंटेंट तैयार किए जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी सभी संकाय प्रमुख व विभागाध्यक्षों को दी जाएगी।
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बीएचयू अब अपने विद्यार्थियों को संस्कार की भी शिक्षा देगा। खासकर हास्टल में रहने वाली छात्राओं से संवाद और उनकी मुकम्मल सुरक्षा के लिए विश्वविद्यालय ने काउंसलिंग एंड गाइडेंस सेल गठित किया है। इस सेल में विश्वविद्यालय की सीनियर महिला प्रोफेसरों के अलावा समाज के अन्य क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं को भी रखा गया है। घर परिवार से दूर विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं की समय-समय पर काउंसलिंग के लिए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने इस सेल का गठन किया है।
छात्राओं के साथ संवाद और सामंजस्य स्थापित करना और उनका मार्गदर्शन करना इस सेल का प्रमुख उद्देश्य है। सेल के सदस्य समय-समय पर हॉस्टल में जाकर छात्र-छात्राओं से बातचीत करेंगे। उनकी व्यक्तिगत शिकायतें सुनेंगे और संकाय स्तर पर डीन उसका समाधान करेंगे। समस्या जटिल होने पर विश्वविद्यालय के आला अधिकारी इस मामले को देखेंगे और उसे निस्तारित कराएंगे। यही व्यवस्था छात्रों के लिए भी है।