बीएचयू: कुलपति बोले- प्राचीन इतिहास विभाग की वेबसाइट बनाकर अतीत पर हुए शोध को पढ़ाया जाए
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि शताब्दी समारोह में ही एलुमनाई की एक व्याख्यान शृंखला भी हो। भविष्य में विभाग के 150 या 200 साल पूरे होने पर पुराने लोगों के साथ ही नए लोगों की उपलब्धियों को एक मंच पर लाया जा सकता है।
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Varanasi News: बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग स्थापना का शताब्दी वर्ष समारोह बुधवार को शुरू हुआ। भारती सभागार में शताब्दी समारोह का शुभारंभ कर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में ही विभाग का एक वेबसाइट बनाकर अतीत पर हुए विभागीय शोधों को छात्रों और आम लोगों को पढ़ाया जाए। यहां विभाग से जुड़े विद्वत जनों का साक्षात्कर, विभाग में हुए शोध कार्य और विभाग से जुड़ीं सारी जानकारियां एक जगह मिलेंगी।
अतीत का अवलोकन करते हुए भविष्य की योजना बनाएं। ताकि विभाग 100 साल के इतिहास को ज्यादा लाभकारी बनाया जा सके। विभागाध्यक्ष प्रो. एमपी अहिरवार ने बताया कि विभाग के शताब्दी समारोह में वर्षभर होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों का खाका बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस समारोह के तहत विभिन्न व्याख्यान, कार्यशाला और संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
शताब्दी समारोह के अंत में शोध कार्य पर छपे एक किताब
कुलपति ने कहा कि शोध के लिए बाकी विभागों को शामिल किया जाए। इससे शोध के नए विषयों का पता चल सकेगा। कुलपति ने सुझाव दिया कि शताब्दी समारोह के अंत में विभाग में हो रहे शोध कार्य पर एक किताब का संपादन हो। इससे विभाग में अब तक के हुए शोध कार्यों में से सबसे उच्च कोटि के शोध कार्य बाहर आएंगे। इन्हें दुनिया भर के एकेडमिक जगत में स्थान मिलेगा।
विभाग के ब्रोशर और दो किताबों का किया लोकार्पण
उद्घाटन सत्र में कुलपति ने विभाग के अवकाश प्राप्त शिक्षकों को सम्मानित किया। विभाग के ब्रोशर, एक किताब और पत्रिका का लोकार्पण किया गया। इसमें डॉ. माहेश्वरी प्रसाद द्वारा रचित ‘महाभारत में समाज-सुधार, अहिंसा और शांति विषयक चिंतन’ पुस्तक और प्रो. पीएन सिंह, संपादक डॉ. डी. राजा रेड्डी, प्रो. दानिश मोहन और डॉ. अमित कुमार उपाध्याय द्वारा संपादित ‘द जर्नल ऑफ द नूमिस्मेटिक सोसायटी ऑफ इंडिया’ पत्रिका शामिल था। विभागाध्यक्ष के कार्यालय और विभागीय उत्खनन प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। कुलपति ने विभाग के पुस्तकालय और संग्रहालय का भी दौरा किया। साथ ही उद्यान क्षेत्र में कल्पवृक्ष और बोधिवृक्ष का पौधा रोपा।