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सरसों उत्पादन में किसानों की मदद कर रहा बीएचयू
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वाराणसी। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान की ओर से सरसों की खेती करने वाले किसानों की मदद के लिए कदम आगे बढ़ाया गया है। कृषि वैज्ञानिक सोनभद्र के 100 से अधिक किसानों को राई-सरसों उत्पादन से जुड़ी तकनीकी बारीकियां बताने में लगे हैं।
सोनभद्र के चतरा ब्लॉक में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए निदेशक प्रो. रमेश चंद ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के समय में सरसों उत्पादकता में स्थायित्व, फसल चक्र में विविधता, फसल सघनन के द्वारा किसानों की आय बढ़ाने वाली फसल है।
भारत सरकार के कृषि मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान राई सरसों अनुसंधान निदेशालय के सहयोग से चल रही उपयोजना में संकाय प्रमुख प्रो. एपी सिंह ने मृदा प्रकार के आधार पर सोनभद्र क्षेत्र में सरसों की खेती पर बल देते हुए कहा कि धान-गेहूं की तुलना में राई-सरसों की फसल में कम उर्वरक एवं सिंचाई की आवश्यकता होती है। संस्थान के विशिष्ट आचार्य डॉ. जय प्रकाश लाल ने उन सरकारी कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला जिससे किसान लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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प्रो. कार्तिकेय श्रीवास्तव ने बताया कि इस साल 200 से अधिक किसानों को सामान्य प्रजातियों से डेढ़ गुना अच्छी उपज देने वाली उन्नत किस्म गिरीराज तथा आरएच 749 किस्म वितरित किया गया है। इसमें तेल की मात्रा 40-42 प्रतिशत तक होती है। कार्यक्रम में डा. राजेश सिंह, प्रो. अनुपम नेमा, प्रो. बिरेंची कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।
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सोनभद्र के चतरा ब्लॉक में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए निदेशक प्रो. रमेश चंद ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के समय में सरसों उत्पादकता में स्थायित्व, फसल चक्र में विविधता, फसल सघनन के द्वारा किसानों की आय बढ़ाने वाली फसल है।
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भारत सरकार के कृषि मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान राई सरसों अनुसंधान निदेशालय के सहयोग से चल रही उपयोजना में संकाय प्रमुख प्रो. एपी सिंह ने मृदा प्रकार के आधार पर सोनभद्र क्षेत्र में सरसों की खेती पर बल देते हुए कहा कि धान-गेहूं की तुलना में राई-सरसों की फसल में कम उर्वरक एवं सिंचाई की आवश्यकता होती है। संस्थान के विशिष्ट आचार्य डॉ. जय प्रकाश लाल ने उन सरकारी कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला जिससे किसान लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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प्रो. कार्तिकेय श्रीवास्तव ने बताया कि इस साल 200 से अधिक किसानों को सामान्य प्रजातियों से डेढ़ गुना अच्छी उपज देने वाली उन्नत किस्म गिरीराज तथा आरएच 749 किस्म वितरित किया गया है। इसमें तेल की मात्रा 40-42 प्रतिशत तक होती है। कार्यक्रम में डा. राजेश सिंह, प्रो. अनुपम नेमा, प्रो. बिरेंची कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।