फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   BHU students connect 88 defunct telephone pipes in their hostel to create drains

BHU: खराब पड़े 88 टेलीफोन पाइप को जोड़कर बनाईं नालियां, हॉस्टल में छात्रों ने की रेन वाटर हार्वेस्टिंग

Mon, 06 Oct 2025 04:27 PM IST
प्रगति चंद हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 06 Oct 2025 04:27 PM IST
सार

बीएचयू के छात्रों ने एक हॉस्टल में ऐसे सिस्टम तैयार किया है, जिसने यहां बारिश के बाद जलभराव नहीं होने दिया। बारिश बंद होते ही पानी सीधे जमीन के नीचे पाइपों के जाल से होते हुए मुख्य निकासी में मिल गया।  

विज्ञापन
BHU students connect 88 defunct telephone pipes in their hostel to create drains
सरदार पटेल हॉस्टल में पानी की निकासी के लिए बने चेंबर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बनारस में 187 मिमी बारिश के बाद बीएचयू में चारों ओर कमर तक जलभराव की समस्या देखने को मिली। वहीं, दूसरी ओर बीएचयू का एक हॉस्टल ऐसा भी था जिसके रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ने 10 मिनट भी हॉस्टल परिसर में पानी नहीं लगने दिया। बारिश बंद होते ही पानी सीधे जमीन के नीचे पाइपों के जाल से होते हुए मुख्य निकासी में मिल गया। इस हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने ही ये सिस्टम तैयार किया है। 

विज्ञापन


बीएचयू के सरदार वल्लभ भाई पटेल हॉस्टल में नौ जगहों पर वाटर ड्रेन बनाए गए हैं, जिनकी गहराई 10-10 फीट तक है। इससे पानी धीरे-धीरे जमीन के अंदर चला जाता है। दशकों से बेकार पड़े 88 टेलीफोन पाइप को निकाला गया और कुछ पाइप की वेल्डिंग कराई और जमीन के अंदर नाली बनाकर कुल 19 चेंबर बनाए। इन सभी छोटे- छोटे चेंबर्स के सहारे सभी तरह की जल निकासी को मुख्य चेंबर के साथ जोड़ दिया गया। इसमें 12 वाटर कूलर फिल्टर भी लगाए गए हैं। 
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें; Mirzapur News: सो रहे बेटे को जगाने पहुंची मां, फंदे से लटकते देख निकली चीख; इस वजह से युवक ने दी जान

विज्ञापन
विज्ञापन

इस सिस्टम को हॉस्टल के प्रशासनिक संरक्षक डॉ. धीरेंद्र राय और उनके छात्रों की टीम ने तैयार किया है, जिसमें आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिक प्रो. वी कुमार की मदद ली गई है। हॉस्टल के वॉलीबॉल कोर्ट, दो बैडमिंटन कोर्ट, दर्जनों सीटिंग बेंच सहित परिसर में छोटे बड़े कुल नौ उद्यान में कहीं भी जलभराव नहीं था। इन सब काम को बिना किसी सरकारी वित्तीय मदद के छात्रों के साथ मिलकर किया गया।

इसे भी पढ़ें; Diwali 2025: हवाई यात्रा हुई महंगी, दिवाली पर मुंबई से वाराणसी का 4500 रुपये का टिकट 29,600 में
 
840 ट्रक मिट्टी और सात हजार ईंटें लगवाईं
डॉ. धीरेंद्र राय ने बताया कि यह सब हॉस्टलर्स और यहां के लोगों की वजह से संभव हो पाया है। छात्रावास के छात्रों और कर्मचारियों के साथ मिलकर पांच वर्ष पहले ही लैंडस्केपिंग, गार्डनिंग, प्लांटेशन और जलनिकासी पर बहुत कार्य किया। सात महीने तक काम चला। इसमें कुल 840 ट्रक मिट्टी और 7000 ईंटें लगीं। आईआईटी बीएचयू के प्रो. वी कुमार ने इस स्ट्रक्चर डिजाइनिंग में मदद की थी। छुट्टी में सभी छात्र जुटते थे और इस काम को पूरा करते थे। ये काम सामूहिक और व्यक्तिगत प्रयासों से पूरा हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed