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बीएचयू : अस्पताल में इलाज और जांच से नाराज छात्रों ने फूंका एमएस का पुतला
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-मरीजों की समस्याओं के लिए एमएस और आईएमएस निदेशक को बताया जिम्मेदार
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बीएचयू अस्पातल में मरीजों की जांच, इलाज में देरी, दलालों की सक्रियता सहित कई समस्याओं का मुद्दा उठाया गया। ज्ञापन देने के बाद कार्रवाई न होने के विरोध में एमएस ऑफिस के सामने आईएमएस निदेशक और एमएस का पुतला फूंका। पुलिस की मौजूदगी में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य, सुरक्षाकर्मी देखते रह गए और छात्रों ने पुतला जला दिया। छात्रों ने नारेबाजी कर एमएस को हटाने की मांग की।
एमएस ऑफिस पर पुतला दहन की सूचना मिलने के बाद ही प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम पहले ही पहुंच गई। यहां के रास्ते और एमसीएच विंग में जाने वाला गेट बंद करवाया। इस दौरान एमएस अपने आफिस में ही बैठे रहे। छात्र जैसे ही पुतला लेकर आए सुरक्षाकर्मियों ने छीनने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सके। छात्र प्रतिनिधि पुनीत मिश्रा ने कहा कि बीएचयू अस्पताल सिर्फ बीएचयू ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल और कई राज्यों के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनरेखा है। महामना पं. मदन मोहन मालवीय की ओर से स्थापित यह संस्थान मानवता के मूल्यों पर आधारित था, लेकिन वर्तमान में यह भ्रष्टाचार का केंद्र बनता जा रहा है। जांच से लेकर आईसीयू में बेड दिलाने के नाम पर दलालों की सक्रियता बढ़ गई है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
सत्यनारायण सिंह ने कहा कि विवि छात्र स्वास्थ्य संकुल की आपातकालीन सेवाएं, जो कोरोना से पहले रात 8 बजे तक चालू रहती थीं, अब तक बहाल नहीं हुईं। उन्होंने बताया कि हजारों छात्रों के लिए केवल छह इमरजेंसी बेड उपलब्ध हैं, जो अत्यंत निराशाजनक है। दिव्यांश धर दुबे ने कहा कि सर सुंदरलाल अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा चुकी हैं। चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रशासन ने मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को पद से नहीं हटाया गया, तो चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान श्यामल, पल्लव, आशीर्वादम, यशवर्धन, दिव्यांशु, अंकित, आयुष और शिवम सोनकर उपस्थित रहे।
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छात्रों की प्रमुख मांगें
एमएस ऑफिस पर पुतला दहन करने आए छात्रों की मांग थी कि मरीजों को समुचित और नियमित भोजन की व्यवस्था, रेडियोलॉजिकल और रक्त जांच रिपोर्ट की डिजिटल उपलब्धता, रेडियोलॉजिकल जांचों की प्रतीक्षा अवधि में कमी, जांच शुल्क में पारदर्शिता, आवश्यक दवाओं की वार्डों में उपलब्धता, आईसीयू नीति में स्पष्टता, और बाहरी उपकरणों, दवाओं की अनिवार्यता समाप्त करना शामिल है।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बीएचयू अस्पातल में मरीजों की जांच, इलाज में देरी, दलालों की सक्रियता सहित कई समस्याओं का मुद्दा उठाया गया। ज्ञापन देने के बाद कार्रवाई न होने के विरोध में एमएस ऑफिस के सामने आईएमएस निदेशक और एमएस का पुतला फूंका। पुलिस की मौजूदगी में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य, सुरक्षाकर्मी देखते रह गए और छात्रों ने पुतला जला दिया। छात्रों ने नारेबाजी कर एमएस को हटाने की मांग की।
एमएस ऑफिस पर पुतला दहन की सूचना मिलने के बाद ही प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम पहले ही पहुंच गई। यहां के रास्ते और एमसीएच विंग में जाने वाला गेट बंद करवाया। इस दौरान एमएस अपने आफिस में ही बैठे रहे। छात्र जैसे ही पुतला लेकर आए सुरक्षाकर्मियों ने छीनने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सके। छात्र प्रतिनिधि पुनीत मिश्रा ने कहा कि बीएचयू अस्पताल सिर्फ बीएचयू ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल और कई राज्यों के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनरेखा है। महामना पं. मदन मोहन मालवीय की ओर से स्थापित यह संस्थान मानवता के मूल्यों पर आधारित था, लेकिन वर्तमान में यह भ्रष्टाचार का केंद्र बनता जा रहा है। जांच से लेकर आईसीयू में बेड दिलाने के नाम पर दलालों की सक्रियता बढ़ गई है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
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सत्यनारायण सिंह ने कहा कि विवि छात्र स्वास्थ्य संकुल की आपातकालीन सेवाएं, जो कोरोना से पहले रात 8 बजे तक चालू रहती थीं, अब तक बहाल नहीं हुईं। उन्होंने बताया कि हजारों छात्रों के लिए केवल छह इमरजेंसी बेड उपलब्ध हैं, जो अत्यंत निराशाजनक है। दिव्यांश धर दुबे ने कहा कि सर सुंदरलाल अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा चुकी हैं। चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रशासन ने मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को पद से नहीं हटाया गया, तो चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान श्यामल, पल्लव, आशीर्वादम, यशवर्धन, दिव्यांशु, अंकित, आयुष और शिवम सोनकर उपस्थित रहे।
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छात्रों की प्रमुख मांगें
एमएस ऑफिस पर पुतला दहन करने आए छात्रों की मांग थी कि मरीजों को समुचित और नियमित भोजन की व्यवस्था, रेडियोलॉजिकल और रक्त जांच रिपोर्ट की डिजिटल उपलब्धता, रेडियोलॉजिकल जांचों की प्रतीक्षा अवधि में कमी, जांच शुल्क में पारदर्शिता, आवश्यक दवाओं की वार्डों में उपलब्धता, आईसीयू नीति में स्पष्टता, और बाहरी उपकरणों, दवाओं की अनिवार्यता समाप्त करना शामिल है।