फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   bhu sir sundar lal hospital facing resourses problem

संसाधनों की कमी से जूझ रहा बीएचयू अस्पताल, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई के लिए एक से पांच माह का इंतजार

Sun, 30 Apr 2017 06:09 PM IST
रबीश श्रीवास्तव,अमर उजाला,वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sun, 30 Apr 2017 06:09 PM IST
विज्ञापन
bhu sir sundar lal hospital facing resourses problem
बेहतर इलाज के लिए पूर्वांचल से हर दिन आते हैं सैकड़ों मरीज - फोटो : अमर उजाला
मरीजों के लगातार बढ़ते दबाव के आगे बीएचयू अस्पताल की सुविधा और संसाधन नाकाफी साबित हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन चाह कर भी मरीजों की समस्याओं का तुरंत समाधान नहीं कर पा रहा है। ऐसे में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आने वाले मरीजों को परेशानी भी हो रही है।
विज्ञापन


यहां ओपीडी में हर दिन मरीजों की भीड़ उमड़ती है, डॉक्टर परामर्श भी दे रहे हैं लेकिन अल्ट्रासाउंड और एमआरआई के लिए एक दो दिन नहीं बल्कि एक माह और पांच माह का इंतजार करना पड़ रहा है।
विज्ञापन

अस्पताल प्रशासन संसाधनों की कमी को वजह मान रहा है और जल्द ही व्यवस्था पटरी पर लाने की कवायद भी शुरू हो गई हैं। 

ओपीडी में इलाज के लिए केवल पूर्वांचल ही नहीं बल्कि बिहार और झारखंड से हजारों मरीज आते हैं। सबकी यही मंशा रहती है कि सस्ता और समय पर बेहतर इलाज होगा लेकिन यहां ओपीडी की बात छोड़ दी जाए तो जांच का बहुत बुरा हाल है। सबसे ज्यादा तकलीफ अल्ट्रासाउंड और एमआरआई के लिए हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसमें अल्ट्रासाउंड वालों को एक माह तो एमआरआई वालों को चार से पांच महीने बांद का नंबर दिया जा रहा है। अब सवाल यह है कि जब तक मरीज बीएचयू में जांच का इंतजार करेगा तब तक उसकी बीमारी कम होने के बजाय बढ़ती ही जाएगी।

ऐसे में परेशानियों को देखते हुए बहुत से मरीज मजबूरी में बाहर जाकर जांच कराते हैं, जिसके लिए उन्हें मोटी रकम भी खर्च करनी पड़ती है। 
 

इन दो मामलों से समझिए हाल

bhu sir sundar lal hospital facing resourses problem
bhu hospital - फोटो : अमर उजाला

केस एक
जौनपुर निवासी विवेक जायसवाल (27)को हार्निया की शिकायत हैं। बुधवार को ओपीडी में पिता के साथ आए विवेक को जांच के दौरान चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। काउंटर पर पहुंचकर सारी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद स्वागत कक्ष से जो पर्चा मिला, उस पर उसे 23 मई की डेट मिली।

पहले तो वह कुछ समझ नहीं सके, बाद में काउंटर पर बैठे कर्मचारी से पूछा तो उन्होंने बताया कि अब तो बहुत कम समय हो गया है, पहले तो दो से तीन माह का समय लगता था। विवेक और उसके पिता थक हारकर वापस चले गए औरकहा कि इससे बढ़िया तो प्राइवेट में करा ले तो बीमारी पकड़ में आ जाएगी। 
केस दो
मिर्जापुर से अपने साढ़े तीन माह के बेटे रितेश को रहरह कर झटका आ रहा था। बाहर लाखों रुपये खर्च करने के बाद जब राहत नहीं मिली तो किसी ने बीएचयू में इलाज कराने की सलाह दी। बाल रोग विभाग की ओपीडी में दिखाने के बाद डॉक्टर ने एमआरआई कराने को कहा, पिता राजू ने सारी औपचारिकताएं पूरी कर जांच का कार्ड बनवाया और जब नंबर लगवाने गया तो छह सितंबर की डेट मिली।

उसे जब यह पता चला कि पांच माह बाद जांच होगी, तो निराश हो गया। कुछ देर बाद वहां से बच्चे को लेकर निकल गया। बताया कि अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था सुधारने की पहल करनी चाहिए, जिससे कि समय से बेहतर इलाज हो सके। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed