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बीएचयू के प्रो. को मिला अब्दुल कलाम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 26 May 2018 02:16 PM IST
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के शशि कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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सांस्कृतिक नगरी काशी के हिस्से में एक और उपलब्धि आई है। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के प्रो. के शशि कुमार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड जबकि बनारस घराने के बांसुरी वादक डॉ. अतुल शंकर को भारत गौरव रत्न सम्मान से नवाजा गया है।
इंटरनेशनल बिजनेस काउंसिल की ओर से बीते गुरुवार को नई दिल्ली में दोनों विभूतियों को यह सम्मान दिया गया। बीएचयू संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के हेड प्रो. के शशि कुमार बीते 25 साल से बीएचयू से जुड़े हैं।
मूलत: केरल के रहने वाले प्रो. के शशि कुमार कर्नाटिक शैली के गायक हैं। मद्रास यूनिवर्सिटी से उन्होंने बीम्यूज, एमम्यूज किया। पीएचडी उन्होंने बीएचयू से ही पूरी की। श्री पीजीवी रमनन से उन्होंने कर्नाटिक शैली का गायन सीखा।
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विदेशों में उन्होंने कई प्रस्तुतियां दी हैं। कई मलयाली और तमिल फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। दूरदर्शन के लिए भी उन्होंने तीन नृत्य नाटिकाओं में अपनी आवाज दी है। उन्हें ये सम्मान गायन के क्षेत्र में उनके तीस साल के योगदान के लिए दिया गया।
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इंटरनेशनल बिजनेस काउंसिल की ओर से बीते गुरुवार को नई दिल्ली में दोनों विभूतियों को यह सम्मान दिया गया। बीएचयू संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के हेड प्रो. के शशि कुमार बीते 25 साल से बीएचयू से जुड़े हैं।
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मूलत: केरल के रहने वाले प्रो. के शशि कुमार कर्नाटिक शैली के गायक हैं। मद्रास यूनिवर्सिटी से उन्होंने बीम्यूज, एमम्यूज किया। पीएचडी उन्होंने बीएचयू से ही पूरी की। श्री पीजीवी रमनन से उन्होंने कर्नाटिक शैली का गायन सीखा।
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विदेशों में उन्होंने कई प्रस्तुतियां दी हैं। कई मलयाली और तमिल फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। दूरदर्शन के लिए भी उन्होंने तीन नृत्य नाटिकाओं में अपनी आवाज दी है। उन्हें ये सम्मान गायन के क्षेत्र में उनके तीस साल के योगदान के लिए दिया गया।
कई देशों में छेड़ी बांसुरी की तान
अतुल शंकर
- फोटो : अमर उजाला
भारत गौरव रत्न सम्मान से नवाजे गए डॉ. अतुल शंकर बनारस घराने के बांसुरी वादक हैं। जर्मनी, इटली, फ्रांस, लंदन, सिंगापुर समेत विदेश के कई शहरों में उन्होंने बांसुरी की तान छेड़ी।
उन्होंने वादन की शिक्षा अपने दादाजी पंडित राम खेलावत व नानाजी पंडित भोलानाथ प्रसन्नजी से ली। पिता पंडित रमा शंकर और मां रीता शंकर से भी उन्होंने संगीत की शिक्षा ली।
डॉ. प्रह्लाद नाथ के निर्देशन में उन्होंने बीएचयू से पीएचडी की। उन्हें यूपी गौरव, कला रत्न सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। संकट मोचन महोत्सव, गंगा महोत्सव, गया महोत्सव, कबीरा फेस्टिवल में भी उनकी खास प्रस्तुतियां हुई हैं।
उन्होंने वादन की शिक्षा अपने दादाजी पंडित राम खेलावत व नानाजी पंडित भोलानाथ प्रसन्नजी से ली। पिता पंडित रमा शंकर और मां रीता शंकर से भी उन्होंने संगीत की शिक्षा ली।
डॉ. प्रह्लाद नाथ के निर्देशन में उन्होंने बीएचयू से पीएचडी की। उन्हें यूपी गौरव, कला रत्न सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। संकट मोचन महोत्सव, गंगा महोत्सव, गया महोत्सव, कबीरा फेस्टिवल में भी उनकी खास प्रस्तुतियां हुई हैं।