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बीएचयू मारपीट प्रकरण: पहले चीफ प्रॉक्टर के बयान पर विरोध, अब जांच पर सवाल

Wed, 09 May 2018 03:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 09 May 2018 03:37 PM IST
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BHU outrage case students start protest against enqiry by chief proctor
चीफ प्रॉक्टर ने दिया था पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक वाला बयान, छात्राओं ने दिया था धरना - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू परिसर में पिछले साल सितंबर में छेड़खानी के विरोध में धरने के दौरान चीफ प्रॉक्टर द्वारा पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक का बयान देने का पहले छात्रों ने विरोध किया अब कार्रवाई का दंश झेल रहे हैं।
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मामले में तीन मई को चीफ प्रॉक्टर ने 13 नामजद छात्रों पर मारपीट, हत्या का प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था, अब इसकी जांच भी शुरू हो गई। उधर छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय की ओर से गठित स्टैडिंग कमेटी की जांच पर सवाल खड़ा किया है। 
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विश्वविद्यालय परिसर का माहौल पिछले 20 दिन से गरमाया है। मारपीट, तोड़फोड़, चाकूबाजी तो कभी आगजनी, पत्थरबाजी की घटनाएं होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं कर रहा है। नया विवाद चीफ प्रॉक्टर के बयान के बाद शुरू हुआ है।
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इसका तीन मई को विरोध करने गए छात्रों पर चीफ प्राक्टर की तहरीर पर इनके विरुद्ध हत्या के प्रयास, तोड़फोड़, मारपीट, बलवा सहित अन्य गंभीर धाराओं में लंका थाने में मुकदमा भी दर्ज हो चुका है।

इधर मामले पर पांच मई को कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. ए वैशंपायन की अध्यक्षता वाली स्टैडिंग कमेटी ने आठ छात्रों को सात मई को बयान के लिए बुलाया। छात्र पहुंचे और बारी बारी से कमेटी के सामने अपना बयान दर्ज कराया।

छात्रों ने सोशल मीडिया पर जारी अपने एक बयान में चीफ प्रॉक्टर के कमेटी होने पर न केवल आपत्ति जताया है बल्कि कमेटी पर ही सवाल खड़ा किया है। बैठक के दौरान चीफ प्रॉक्टर पर डराने-धमकाने का भी आरोप छात्रों की ओर से लगाया गया है।

चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने कहा कि छात्रों द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से गलत है। कमेटी के सदस्य की वजह से बैठक में शामिल हुई थी। यह फैक्ट फाइडिंग कमेटी होती है। कभी भी किसी छात्र का अहित करना किसी का मकसद नहीं होता है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन आगे कार्रवाई करेगा।
 

नियुक्तियों पर आरटीआई के जवाब में भी खेल 

BHU outrage case students start protest against enqiry by chief proctor
बीएचयू

बीएचयू में सांख्यिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफे सर पद पर हुई नियुक्ति के मामले में मांगी गई एक आरटीआई का जवाब तैयार कराने में भी खेल कर दिया गया है। फरवरी में इस नियुक्ति को जहां गलत बताया गया वहीं अप्रैल में उसे सही ठहरा दिया गया।

सिकरौल निवासी संतोष सिंह ने सांख्यिकी विभाग में नियुक्ति को लेकर 26 जनवरी, 2018 को ग्रीवांस पोर्टल पर एक शिक्षक की नियुक्ति को गलत ठहराते हुए उनके द्वारा लगाए गए कागजातों और इससे जुड़ी शिकायतों की जांच की मांग की थी।

विश्वविद्यालय ने इसके बाद विज्ञान संस्थान के  निदेशक से जांच कराई गई। 28 फरवरी को निदेशक ने नियुक्ति में अनियमितता की रिपोर्ट दे दी। विश्वविद्यालय ने आरटीआई आवेदक को यह जवाब नहीं भेजा।

इसके बाद आनन-फानन में पांच मार्च, 2018 को पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दुबारा जांच कराई गई। इस कमेटी में विज्ञान संस्थान की पूर्व निदेशक भी थीं। इस कमेटी ने नियुक्ति को सही ठहराते हुए रिपोर्ट दी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने आठ अप्रैल, 2018 को ग्रीवांस पोर्टल पर नियुक्ति को सही ठहराने वाला जवाब दे दिया।

यह गड़बड़ी तब पकड़ में आई, जब आवेदक ने 24 मार्च को खुद विज्ञान संस्थान के निदेशक से आरटीआई के जरिए जवाब मांगा। निदेशक ने आवेदक को तीन अप्रैल को नियुक्ति में अनियमितता की रिपोर्ट दे दी।
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