बीएचयू: ज्योतिष विभाग से 200 पुरानी थीसिस चोरी, रद्दी में बेचा; मामला खुलने के बाद कुछ वापस आलमारी में रखा
बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग से करीब 200 पुरानी थीसिस चोरी होने का आरोप लगा है। दो कर्मचारियों पर इन्हें रद्दी में बेचने का संदेह है। मामला सामने आने के बाद कुछ थीसिस आलमारी में वापस रखी गईं। छात्रों ने कुलपति से शिकायत कर जांच और बरामदगी की मांग की है।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग से करीब 200 पुरानी थीसिस चोरी होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि संकाय के दो कर्मचारियों ने थीसिस को रद्दी के भाव बेच दिया। शुक्रवार को मामला सामने आने के बाद छात्रों और विभागीय प्रोफेसरों में नाराजगी बढ़ गई। संकाय स्तर पर बैठकें हुईं और कुलपति तक शिकायत पहुंचाई गई।
छात्रों के मुताबिक, पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। मामला खुलने के बाद कुछ थीसिस को वापस आलमारी में रख दिया गया। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कितनी थीसिस वापस मिली हैं और कितनी गायब हैं। छात्रों का कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि थीसिस को वास्तव में रद्दी के भाव बेचा गया या इसके पीछे खरीद-फरोख्त से जुड़ा कोई अन्य मामला है।
छात्रों के अनुसार, जो थीसिस वापस मिली हैं, उनमें वर्ष 1990 के बाद की कोई थीसिस नहीं है। ऐसे में गायब शोध प्रबंधों की वास्तविक संख्या और उनकी विषयवस्तु को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि ज्योतिष विभाग मामले की जांच कराने और सभी थीसिस की बरामदगी की मांग पर अड़ा है।
छात्रों ने आशंका जताई कि पुरानी थीसिस बाहर पहुंचने से उनका दुरुपयोग हो सकता है। इन शोध प्रबंधों की सामग्री का इस्तेमाल करके दूसरे शोध कार्यों में नकल की जा सकती है। साथ ही, पुरानी थीसिस को नया बताकर बेचने की आशंका भी जताई गई है। इससे शोध की मौलिकता और अकादमिक गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
मामले को लेकर छात्रों ने जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और थीसिस की बरामदगी सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि शोध प्रबंध किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक धरोहर होते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और रखरखाव में लापरवाही गंभीर विषय है। फिलहाल, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आने का इंतजार है।