बीएचयू के छात्र शिव की मौत मामला: प्रियंका गांधी बोलीं- पुलिस प्रशासन की लापरवाही साफ झलक रही, परिवार को मिले न्याय
बीएचयू के छात्र शिव कुमार की मौत मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही है।सीबीसीआईडी की एक रिपोर्ट के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग की है।
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उन्होंने लिखा कि 'बीएचयू के छात्र शिव त्रिवेदी के परिवार की दर्दनाक आपबीती सुनकर मन को भारी दुख पहुंचा। पन्ना, मध्यप्रदेश से बीएचयू पढ़ने आए इस मेधावी छात्र के परिवार को दो साल बाद पता चला कि शिव की मृत्यु हो गई। इस पूरी घटना में पुलिस प्रशासन की लापरवाही व असंवेदनशीलता साफ झलकती है और उच्चस्तरीय जांच से ही सही जानकारी व न्याय सुनिश्चित हो पाएगा। शिव त्रिवेदी के परिवार को न्याय जरूर मिलना चाहिए।'
कोर्ट में क्या दी गई जानकारी
विवेचना अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि छात्र मानसिक रूप से बीमार था। उसका इलाज चल रहा था। उसे लंका थाने लाया गया था लेकिन वह उसी रात में निकल गया था। तीसरे दिन एक तालाब के पास लावारिस हाल में उसकी लाश मिली थी जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। फोटो के आधार पर पिता ने पहचाना और डीएनए टेस्ट कराया गया।पता चला कि वह शव बीएचयू के लापता छात्र का था। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने विवेचना अधिकारी को डीएनए रिपोर्ट हलफनामे के साथ दाखिल करने का निर्देश दिया है और याची को भी सरकारी हलफनामे का जवाब दाखिल करने का समय दिया है। याचिका की सुनवाई जुलाई 22 में होगी।
पुलिस अभिरक्षा में मौत के आरोप बुनियाद
राज्य सरकार की तरफ से अपर शासकीय अधिवक्ता मोहम्मद मुर्तजा ने बताया कि पुलिस अभिरक्षा में मौत के आरोप बुनियाद हैं। वह मारपीट के कारण नहीं स्वयं मर गया था। हालांकि पुलिस पर कार्रवाई भी की गई थी। याची ने सरकार की जानकारी को सही न मानते हुए आपत्ति की।
बीएससी तृतीय वर्ष का छात्र था शिव
घटना 13-14 फरवरी 2020 की रात हुई थी जब लंका थाने की पुलिस छात्र को पकड़कर ले गई थी। उसके बाद से वह लापता था। सरकार की तरफ से कहा गया कि छात्र मानसिक कमजोर था। वह लंका थाने से चला गया था। जब कोर्ट ने थाने की फुटेज की बात की तो बताया कि सीसीटीवी कैमरा खराब था। बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र शिवकुमार त्रिवेदी को थाने में पीटकर गायब करने की आशंका पर याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने अधिकारियों को तलब कर फटकारा और जांच सीबीसीआइडी को सौंप दी थी।