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BHU में ईसी बैठक: यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चुनौती देने की मांग, जानें पूरा मामला

Thu, 09 Oct 2025 05:25 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 09 Oct 2025 05:25 AM IST
सार

आदेश दिया गया था कि विश्वविद्यालय दो सप्ताह के भीतर सभी दस्तावेज कार्यकारी परिषद के सामने प्रस्तुत करे और परिषद प्रो. चौबे को सुनवाई का अवसर देकर शीघ्र निर्णय ले।

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BHU EC meeting Demand to challenge Supreme Court decision against professor accused of harassment
BHU - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू में 57 महीने बाद होनी वाली कार्यकारिणी परिषद की बैठक गुरुवार को होगी। पहली बार होगा कि ईसी की बैठक कुलपति आवास और कुलपति कार्यालय में न होकर कहीं दूसरे भवन में होगी। दोपहर तीन बजे के बाद बैठक होगी जो कि देर रात तक चल सकती है। इसमें सभी आठों सदस्यों को उपस्थित होना होगा। इसमें 500 से ज्यादा पेज के 35 एजेंडों को रखा जाएगा। इसमें कैश प्रमोशन का लिफाफा खुलेगा। इसमें 10 से ज्यादा एकेडमिक काउंसिल के फैसलों को भी रखा जाएगा।

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इसमें सबसे विवादित मुद्दा जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर शैल चौबे को पांच साल के बाद फिर से बीएचयू में पढ़ाने का मौका देना होगा। वहीं इसको लेकर अब विरोध भी शुरू हो रहा है। पीड़िता की ओर से ईसी से मांग की गई है कि प्रोफेसर के पक्ष में आए हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाए, जिससे फिर से प्रोफेसर न बन सके। 
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पीड़िता ने आरोप लगाया कि पुरी में यौन उत्पीड़न किया गया था। बीते 25 सितंबर को हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार और कुलपति की ओर से 26 जून को पारित निलंबन आदेश को रद्द कर दिया था और उनको प्रोफेसर पद पर बहाल करने का आदेश दिया गया।

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12 साल से लगातार उत्पीड़न का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाते हुए कहा कि जांच-समिति की रिपोर्ट में मेरे सभी सहपाठियों और चार तत्कालीन विभागाध्यक्षों द्वारा शैल कुमार चौबे के पिछले 12 साल से लगातार छात्राओं का उत्पीड़न करने की पुष्टि के बावजूद एक कॉकस उसे वापस लाने पर आमादा है। 40 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के लिखित और वीडियो बयान दर्ज हैं जिनका अब नई जांच होने की स्थिति में आना असंभव होगा। 

तकनीकी आधार पर दिए गए निर्णय के बाद विश्वविद्यालय उसे सेवा में वापस ले चुका है और विश्वविद्यालय इस आदेश के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में न सिर्फ अपील नहीं कर रहा है। इन तर्कों को आधार बना कर उन्हें कार्यपरिषद से अनुमोदित करा कर उनकी नियमित सेवाओं में वापसी कराई जा रही है।

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