बीएचयू के शोधकर्ताओं को मिली बड़ी कामयाबी, जीका वायरस को लेकर किया ये अहम शोध
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मच्छरों से फैलने वाला जीका वायरस मस्तिष्क संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देने में सहायक होता है। इसका एनएस-1 प्रोटीन और भी घातक होता है। मस्तिष्क के संक्रमण में इसकी भूमिका को लेकर आईएमएसबीएचयू के मालिक्यूलर बायोलॉजी में प्रो सुनीत सिंह ने अहम शोध किया है।
प्रोफेसर सुनीत ने बताया कि जीका वायरस जो कि एडीज मच्छर से होता है और यह वही मच्छर है जो डेंगू, चिकनगुनिया और एलो फीवर वायरस के संक्रमण का कारण बनता है। जीका वायरस संक्रमण से शिशुओं में माइक्रोसेफली या वयस्कों में गुड लाइन बार्रे सिंड्रोम होने की संभावना रहती है। इसके असर से नवजात शिशु के मस्तिष्क का आकार असामान्य और अविकसित भी होता है।
उन्होंने बताया कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड भी 2 से 7 दिन तक होता है। 2015 में ब्राजील, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया में इसका प्रकोप देखा गया, जबकि भारत में 2018 में इसके 157 मामले भी सामने आए हैं। हालांकि अभी भी वैक्सीन के निर्माण का काम परीक्षण के तौर पर चल रहा है।
प्रोफेसर सुनीता ने बताया कि प्रोटीन की वजह से मस्तिष्क में बहुत से इंफ्लेमेटरी तत्व क्रियाशील हो जाते हैं। जीका वायरस का यह प्रोटीन ब्लड ब्रेन बैरियर को कमजोर कर देता है जो कि शिशु के मस्तिष्क में जीका वायरस के प्रवेश में मददगार सिद्ध होता है।
जुलाई 2020 में ही एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जनरल में इस शोध का प्रकाशन भी हो चुका है उन्होंने बताया कि इस शोध के बाद जिका वायरस से बचाव को लेकर के औषधियों के निर्माण सहित अन्य कार्य में भी सहायता मिलेगी।