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बीएचयू के मेडिकल के छात्र ने मोक्ष के लिए गंगा में ली जलसमाधि
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वाराणसी। बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) के एमबीबीएस के छात्र रहे डॉ. नवनीत पराशर ने तंत्र-मंत्र के चक्कर में आकर मोक्ष के लिए विंध्याचल जाकर जल समाधि ली है। यह लंका थाने की पुलिस का मानना है। बीते नौ जून को नवनीत के गायब होने के बाद प्रकरण की तफ्तीश कर रहे लंका इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि कोई और वजह सामने नहीं आई है।
पुलिस का कहना है कि नवनीत के दोस्तों, परिजनों और उसे जानने वालों से बातचीत की गई। कमरा भी चेक किया गया था। बीएचयू के धन्वंतरि हॉस्टल का कमरा छोड़ने से पहले नवनीत अपने दोस्तों से बातचीत बंद कर दिया था। विंध्याचल में लगे सीसी कैमरों की फुटेज के अनुसार नवनीत नारियल और सिंदूर खरीदा था। इसके बाद कपड़ा पहनकर ही वह गंगा में नहाया और फिर बाहर आकर पूजा-पाठ किया। विंध्याचल में जिस पंडा से नवनीत की आखिरी बात हुई थी, उन्हें वह अपनी बाइक की चाबी दक्षिणा के तौर पर दी थी। इसके बाद पंडा से पैर में लगी मिट्टी को साफ करके वापस आने की बात कह कर नारियल और सिंदूर को घाट किनारे की सीढ़ियों पर ही छोड़कर वह गंगा की ओर ही न जाने कहां चला गया। लंका इंस्पेक्टर ने बताया कि तफ्तीश में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उससे यही साबित हुआ है कि नवनीत का संसार से मोहभंग हो गया था। मोक्ष प्राप्ति को ही वह अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य मान लिया था।
बीएचयू के पूर्व एमएस ने पुलिस से की जांच की मांग
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक और आईएमएस के छात्र सलाहकार प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की मांग पुलिस से की है। प्रो. मिश्रा ने कहा कि डॉ. नवनीत पराशर के पिता ने अपने बेटे की मौत के लिए विंध्याचल के तांत्रिकों को जिम्मेदार ठहराया है। ना जाने यह अंधविश्वास कितनों की जान और लेगा। पुलिस से अनुरोध है कि इस मामले की जांच करा कर दोषियों को सख्त सजा दिलाएं।
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पुलिस का कहना है कि नवनीत के दोस्तों, परिजनों और उसे जानने वालों से बातचीत की गई। कमरा भी चेक किया गया था। बीएचयू के धन्वंतरि हॉस्टल का कमरा छोड़ने से पहले नवनीत अपने दोस्तों से बातचीत बंद कर दिया था। विंध्याचल में लगे सीसी कैमरों की फुटेज के अनुसार नवनीत नारियल और सिंदूर खरीदा था। इसके बाद कपड़ा पहनकर ही वह गंगा में नहाया और फिर बाहर आकर पूजा-पाठ किया। विंध्याचल में जिस पंडा से नवनीत की आखिरी बात हुई थी, उन्हें वह अपनी बाइक की चाबी दक्षिणा के तौर पर दी थी। इसके बाद पंडा से पैर में लगी मिट्टी को साफ करके वापस आने की बात कह कर नारियल और सिंदूर को घाट किनारे की सीढ़ियों पर ही छोड़कर वह गंगा की ओर ही न जाने कहां चला गया। लंका इंस्पेक्टर ने बताया कि तफ्तीश में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उससे यही साबित हुआ है कि नवनीत का संसार से मोहभंग हो गया था। मोक्ष प्राप्ति को ही वह अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य मान लिया था।
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बीएचयू के पूर्व एमएस ने पुलिस से की जांच की मांग
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक और आईएमएस के छात्र सलाहकार प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की मांग पुलिस से की है। प्रो. मिश्रा ने कहा कि डॉ. नवनीत पराशर के पिता ने अपने बेटे की मौत के लिए विंध्याचल के तांत्रिकों को जिम्मेदार ठहराया है। ना जाने यह अंधविश्वास कितनों की जान और लेगा। पुलिस से अनुरोध है कि इस मामले की जांच करा कर दोषियों को सख्त सजा दिलाएं।
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