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बीएचयू की शान भारत कला भवन बनेगा अब ग्रीन म्यूजियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 15 Apr 2018 03:29 PM IST
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भारत कला भवन
- फोटो : अमर उजाला
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय की शान माना जाने वाला भारत कला भवन अब ग्रीन म्यूजियम बनने की ओर अग्रसर है। इस पूरे भवन को सौर ऊर्जा से लैस करने की तैयारी चल रही है। संग्रहालय को पूरी तरह से लाइट एंड साउंड सिस्टम पर संचालित किया जाएगा और इसमें सौर ऊर्जा का ही इस्तेमाल होगा।
इसके लिए भवन के रूफ टॉप पर 200 किलोवॉट का सोलर प्लांट लगाया जाएगा। एक करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसकी मंजूरी मिल गई है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से बजट भी जारी हो चुका है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
कला साहित्य इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल बीएचयू के भारत कला भवन को अपग्रेड किया जा रहा है। इसमें 15 गैलरी हैं जिसके रिनोवेशन का काम हो चुका है।
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अब यहां की अमूल्य कृतियों को रखने के लिए मॉडर्न शो-केस और डिजिटल कियास्क तैयार किए जा रहे हैं। हर कृति के पीछे की कहानी को उसकी डिस्प्ले स्टोरी में पढ़ा जा सकेगा। बारिश, नमी और धूप के चलते यहां की दुर्लभ कलाकृतियां नष्ट न हों इसके लिए क्लाइमेट कंट्रोल कैबिनेट तैयार किए जा रहे हैं।
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इसके लिए भवन के रूफ टॉप पर 200 किलोवॉट का सोलर प्लांट लगाया जाएगा। एक करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसकी मंजूरी मिल गई है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से बजट भी जारी हो चुका है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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कला साहित्य इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल बीएचयू के भारत कला भवन को अपग्रेड किया जा रहा है। इसमें 15 गैलरी हैं जिसके रिनोवेशन का काम हो चुका है।
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अब यहां की अमूल्य कृतियों को रखने के लिए मॉडर्न शो-केस और डिजिटल कियास्क तैयार किए जा रहे हैं। हर कृति के पीछे की कहानी को उसकी डिस्प्ले स्टोरी में पढ़ा जा सकेगा। बारिश, नमी और धूप के चलते यहां की दुर्लभ कलाकृतियां नष्ट न हों इसके लिए क्लाइमेट कंट्रोल कैबिनेट तैयार किए जा रहे हैं।
संग्रहालय में एक लाख से अधिक कलाकृतियां
भारत कला भवन
- फोटो : अमर उजाला
भारत कला भवन के निदेशक प्रो. एके सिंह ने बताया कि संग्रहालय में एक लाख से अधिक कलाकृतियां हैं। उनका डिजिटलाइजेशन भी हो रहा है। 50 फीसदी का डेटा बेस तैयार हो चुका है।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार यहां मौजूद कृतियों का भौतिक सत्यापन कराने के साथ ही उनका मूल्यांकन किया जा रहा है। अब तक छह हजार कृतियों का भौतिक सत्यापन हो चुका है जिसमें सामने आया है कि हमारे पास दो-दो करोड़ की भी पेंटिंग हैं।
ये देश का इकलौता संग्रहालय होगा, जहां की कृतियों का भौतिक सत्यापन और उनका मूल्यांकन कराया जा रहा है। इस काम को पूरा होने में करीब एक से डेढ़ साल का वक्त लगेगा।