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बीएचयू: पुरातत्व जंतु विज्ञान कोर्स शुरू, नीएंडरथल मानवों और डीएनए तकनीक को पढ़ेंगे छात्र; जानें खास
Thu, 16 Oct 2025 05:27 AM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Thu, 16 Oct 2025 05:27 AM IST
सार
Varanasi News: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शुरू हुए नए कोर्स में सिंधु-सरस्वती घाटी, नीएंडरथल मानवों और डीएनए तकनीक समेत अतीत के विज्ञान से जुड़े हजारों तथ्य सामने आएंगे।
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BHU
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीएचयू में नई शिक्षा नीति के तहत पुरातत्व जंतु विज्ञान नाम से तीन क्रेडिट का एक मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स शुरू किया गया है। इसकी कक्षा लेने के लिए देश भर के विद्वानों को बीएचयू बुलाया जाएगा। इस कोर्स की पढ़ाई बीएससी तीसरे सेमेस्टर में होगी।
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जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने इस कोर्स को डिजाइन किया है। इसमें छात्रों को पुरातत्व से जोड़कर मानव और पशु अवशेषों का अध्ययन कराया जाएगा। कोर्स में मानव विकास पर खास फोकस किया गया है। यह दक्षिण एशिया के प्रागैतिहासिक कालखंड यानी कि 25 लाख ईसा पूर्व तक जीवन को वैज्ञानिक दृष्टि से उजागर करेगा। इस कोर्स का उद्देश्य शिक्षा की अवधारणा को मजबूत करना है। इसमें विज्ञान, इतिहास, पुरातत्व और आनुवंशिकी शामिल हैं।
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प्रोफेसर चौबे ने बताया कि कोर्स की संरचना पाषाण युग से लेकर प्राचीन डीएनए तक के रोचक सफर पर आधारित है। छात्रों को पुरातत्व और जंतु विज्ञान के मूल सिद्धांतों से परिचित कराएगी। कोर्स में वरिष्ठ विशेषज्ञों के अतिथि व्याख्याता के तौर पर शामिल किया गया है। इनमें प्रो. वसंत शिंदे, डॉ. के. थंगराज, डॉ. सचिन तिवारी हैं। प्रो. शिंदे ने कहा कि यह कोर्स दक्षिण एशिया के प्राचीन रहस्यों को नई दृष्टि से देखने का अवसर देगा, जो भविष्य के शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा।
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मानव को आकार देने वाले विज्ञान को जानेंगे छात्र...
- दक्षिण एशिया की पुरातात्विक कालक्रम पर चर्चा होगी, जो पाषाण युग से लौह युग तक फैली हुई है।
- कोर्स मे दक्षिण एशिया के कृषि के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
- प्रारंभिक कृषि क्रांति, पशुपालन और जंगली जानवरों से घरेलू पशुओं के क्रमिक विकास को शामिल किया गया है।
- कांस्य और लौह युगों में औजारों का निर्माण और सभ्यताओं का उदय बताया गया है।
- सिंधु-सरस्वती घाटी और गंगा घाटी के मानव और पशु अवशेषों का वैज्ञानिक विश्लेषण होगा।
- मानव उत्पत्ति के उन परिवर्तनों को बताया जाएगा, जिन्होंने मानव को आकार दिया।
- आधुनिक मानवों का अफ्रीका से बाहर प्रवास और दक्षिण एशिया की आनुवंशिक विविधता पर विस्तार से चर्चा होगी।
- नीएंडरथल, डेनिसोवांस जैसे प्राचीन मानवों और जीनोमिक रहस्यों को भी गहराई से समझाया जाएगा।
- कोर्स का एक महत्वपूर्ण भाग प्राचीन डीएनए तकनीक पर केंद्रित है। इसमें इसकी ऐतिहासिक विकास, मानव विकास में भूमिका, पशुपालन की जीन तकनीक, लैक्टोज सहनशीलता तथा रोगों के प्रभाव जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।