BHU: अमेरिकी वैज्ञानिक बोले - घर का भोजन ही कैंसर की कारगर दवा, एआई ट्रीटमेंट से बीमारी होगी आधी; जानें खास
UP News: सम्मेलन में वक्ताओं ने बताया कि फलों और हरी सब्जियों में ही मिलने वाले तत्व को कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं पर डाला तो पता चला ये कैंसर कोशिकाओं के विकास को कम कर देती हैं।
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Varanasi News: बीएचयू में शनिवार को जंतु विज्ञान विभाग के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएईएमआरएच) 2025 के दूसरे दिन अमेरिकी वैज्ञानिकों ने घरेलू भोजन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को कैंसर का जानी दुश्मन बताया। घर का भोजन और फलों से मिलने वाले तत्व प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं के लिए इम्यूनथेरेपी का काम करते हैं।
ये कैंसर की कोशिकाओं को मार देते हैं, लेकिन उनका समूल नाश नहीं करते। ये एक तरह से बायो रेडियोथेरेपी की तरह हैं। वहीं एआई ट्रीटमेंट के तहत मशीन लर्निंग, कंप्यूटर सिमुलेशन और डेटा टेक्नोलॉजी कैंसर से मरने और बीमार होने वालों की संख्या को आधा किया जा सकता है। एआई अगले 10 साल में कैंसर का तोड़ जरूर निकालेगा।
अमेरिका की अलबामा स्टेट यूनिवर्सिटी में कैंसर रिसर्च सेंटर के निदेशक प्रो. मनोज के. मिश्रा ने बताया कि कैंसर के इलाज में बीएचयू के साथ मिलकर काम करेंगे। बीएचयू के छात्रों को लेकर अमेरिका भी जाएंगे। उन्होंने प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में बड़ा रिसर्च कर बताया कि शरीर के इम्यून सेल को ट्रेनिंग देकर कैंसर से जीता जा सकता है।
डाइट में कार्बोहाइड्रेट और वसा ज्यादा न हो
डाइट में कार्बोहाइड्रेट और वसा ज्यादा न हो। प्रोटीन की मात्रा अच्छी हो। एक बार में ज्यादा न खाकर तीन से चार भाग में खाए, इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होगा। विश्व में पांच में से चार लोगों को प्रोस्टेंट कैंसर की समस्या रहती है लेकिन इस बीमारी का पता 50 या 60 साल के बाद चलता है। अमेरिका में 40 साल की उम्र के बाद हर साल लोगों का डिजिटल रेक्टम चेकअप होता है। इससे कैंसर की जानकारी मिल जाती है लेकिन भारत में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है।
प्रजनन जीव विज्ञान सहित पढ़े 50 शोध पत्र
इस कार्यक्रम में छह देशों के वैज्ञानिक और डॉक्टर पहुंचे हैं। सम्मेलन संयोजक डॉ. राघव कुमार मिश्रा ने कहा कि कैंसर और मानव स्वास्थ्य को लेकर 50 से ज्यादा शोध पत्र पढ़े गए। डॉ. राघव ने बताया कि इन सत्रों में प्रजनन जीव विज्ञान, शैल बायोमिनरलाइजेशन, कैंसर इम्यूनोथेरेपी और स्टेम सेल विज्ञान पर अत्याधुनिक अनुसंधान प्रस्तुत किए गए।
कैल्शियम-समृद्ध कवच का निर्माण
कार्यक्रम में आए पुर्तगाल और चीन के प्रो. डेबोरा एम. पावर ने बताया कि द्विवाल्वी (बाइवैल्व) जीव अपने कैल्शियम-समृद्ध कवच का निर्माण और रखरखाव करते हैं। मुंबई के डॉ. श्रवणी मुखर्जी ने पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में चयापचयी (मेटाबॉलिक) परिवर्तनों के कारण अंडाणु गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभावों पर निष्कर्ष को साझा किया। आईसीएमएआर की डॉ. मालिनी लालोराया ने एंडोमेट्रियल डांस पर उन्होंने बताया कि गर्भाशय की परत में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तन किस प्रकार भ्रूण के सफल आरोपण (इम्प्लांटेशन) में सहयोग करते हैं। केरल विवि के डॉ. प्रदीप जी. कुमार के स्टेम सेल अनुसंधान पर चर्चा हुई।