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शहनाई उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पुत्र जामिन हुसैन सुपुर्दे खाक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 10 Feb 2018 08:40 PM IST
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उस्ताद जामिन हुसैन
- फोटो : file photo
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भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पुत्र और उनके उत्तराधिकारी जामिन हुसैन का शनिवार की सुबह निधन हो गया। कालीमहल स्थित आवास पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। जामिन हुसैन के निधन की सूचना मिलते ही उनके आवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के बाद उनकी विरासत उस्ताद ज़ामिन हुसैन खां ने संभाल रखी थी। 75 वर्ष के ज़ामिन पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। जामिन के पुत्र आफाक ने बताया कि अब्बा की तबियत काफी दिनों से खराब चल रही थी, आज सुबह 6 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
उस्ताद ज़ामीन अली खां को देर शाम दरगाह फातमान में बिस्मिल्लाह खां के मकबरे के पास दफनाया गया। शाम को जामिन के जनाजे में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल रहे।
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दरगाहे फातमान में जामिन हुसैन को सुपुर्दे खाक किया गया। उस्ताद की कब्र के पास में ही उनके बेटे को भी जगह दी गई। जनाजे की नमाज मौलाना अकील हुसैनी ने पढ़ाई। मौलाना जमीरूल हसन ने मजलिस पढ़ी।
गौरतलब है कि भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के देहांत के बाद उनके पुत्र नय्यर हुसैन बिस्मिल्लाह ने उनकी विरासत को संभाला था। नय्यर हुसैन की मृत्यु के बाद बिस्मिल्लाह के पुत्र जामिन हुसैन ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई में स्वर लहरियां फूंकी थी। आज उनके देहांत के बाद एक बार फिर शहनाई ‘गूंगी’ हो गयी।
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के बाद उनकी विरासत उस्ताद ज़ामिन हुसैन खां ने संभाल रखी थी। 75 वर्ष के ज़ामिन पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। जामिन के पुत्र आफाक ने बताया कि अब्बा की तबियत काफी दिनों से खराब चल रही थी, आज सुबह 6 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
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उस्ताद ज़ामीन अली खां को देर शाम दरगाह फातमान में बिस्मिल्लाह खां के मकबरे के पास दफनाया गया। शाम को जामिन के जनाजे में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल रहे।
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दरगाहे फातमान में जामिन हुसैन को सुपुर्दे खाक किया गया। उस्ताद की कब्र के पास में ही उनके बेटे को भी जगह दी गई। जनाजे की नमाज मौलाना अकील हुसैनी ने पढ़ाई। मौलाना जमीरूल हसन ने मजलिस पढ़ी।
गौरतलब है कि भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के देहांत के बाद उनके पुत्र नय्यर हुसैन बिस्मिल्लाह ने उनकी विरासत को संभाला था। नय्यर हुसैन की मृत्यु के बाद बिस्मिल्लाह के पुत्र जामिन हुसैन ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई में स्वर लहरियां फूंकी थी। आज उनके देहांत के बाद एक बार फिर शहनाई ‘गूंगी’ हो गयी।