भारत बंद: वाराणसी में नहीं दिखा बंद का असर, सड़कों पर उतरे विपक्ष के नेता, 100 से ज्यादा गिरफ्तार
कृषि कानून के खिलाफ किसानों के भारत बंद के समर्थन में सड़कों पर पूरा विपक्ष उतर गया। वाराणसी जिले के बाजार में मिलाजुला असर दिखा। इक्का-दुक्का ही दुकानें बंद रही, लेकिन जो दुकानें खुली थी उन पर बंद का जबरदस्त असर दिखा। पहड़िया मंडी में मंगलवार को साप्ताहिक बंदी रहती है। इसलिए बंद का असर कुछ देखने को नहीं मिला।
ग्राहक अन्य दिनों की अपेक्षा कम आए। विरोधी पार्टियों ने धरना, प्रदर्शन, तालाबंदी, हल्ला, हंगामा, नोकझोंक, धक्का-मुक्की, जुलूस, मार्च के जरिए सरकार को घेरा। इनके बीच 100 से अधिक विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ता और किसान संगठन से जुड़े लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
दिन की शुरुआत के साथ ही सपा ने वाराणसी के जिला मुख्यालय पर डीएम कार्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर विरोध जताया। कृषि कानून वापस लेने की मांग को लेकर एसीएम चतुर्थ को ज्ञापन सौंपने के बाद गेट खोला।
कार्यकर्ता गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेजे गए। उधर रोहनिया स्थित गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किसान संगठनों के भारत बंद के आह्वान का समर्थन करने जा रहे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को जिला प्रशासन ने गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेजा। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में मिलाजुला असर दिखा।
कहीं दुकानें खुली थी तो कहीं बंद थी। बसपा, सुभासपा, अपना दल, भाकपा, माकपा, बुनकर मोर्चा, किसान पंचायत सहित कई संगठनों ने धरना प्रदर्शन के जरिए विरोध दर्ज कराया।
वाराणसी के मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल और आईजी रेंज विजय सिंह मीना ने भारत बंद के मद्देनजर लहुराबीर, गोदोलिया, लंका, सुन्दरपुर, मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन और नगर के अन्य क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान आईजी रेंज ने पुलिसकर्मियों को सतर्कता के साथ ड्यूटी करने का निर्देश दिया।