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विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस: 456 दिन में 389 दिन ग्रीन जोन में रही काशी, वायु गुणवत्ता में हुआ है सुधार
Thu, 26 Sep 2024 11:27 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 26 Sep 2024 11:27 AM IST
सार
बनारस में वायु गुणवत्ता में बड़े स्तर पर सुधार हुआ है। पिछले 456 दिन में 389 दिन काशी ग्रीन जोन में रही। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स सौ के अंदर बना हुआ है।
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काशी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर में शामिल रहे बनारस की हवा अब बदल चुकी है। सवा साल के आंकड़ों पर गौर करें तो शहर की वायु गुणवत्ता में बड़े स्तर पर सुधार हुआ है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का असर रहा कि शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स पिछले डेढ़ साल से सौ के अंदर ही बना हुआ है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में वाराणसी की हवा में 17 से 21 फीसदी से भी अधिक का सुधार हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के एप समीर के अनुसार चार साल पहले बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स रेड जोन को पार कर चुका था। एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 के ऊपर था लेकिन 2022 में हवा को सुधारने के लिए शुरू हुआ राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का असर नजर आने लगा है।
सवा साल के आंकड़ों पर गौर करें तो शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स कभी सौ के नीचे तो कभी 50 के आसपास ही था। 389 दिन तो बनारस का वायु गुणवत्ता सूचकांक ग्रीन जोन में ही था।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के एप समीर के अनुसार चार साल पहले बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स रेड जोन को पार कर चुका था। एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 के ऊपर था लेकिन 2022 में हवा को सुधारने के लिए शुरू हुआ राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का असर नजर आने लगा है।
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सवा साल के आंकड़ों पर गौर करें तो शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स कभी सौ के नीचे तो कभी 50 के आसपास ही था। 389 दिन तो बनारस का वायु गुणवत्ता सूचकांक ग्रीन जोन में ही था।
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हवा में पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा में 17 से 21 फीसदी की कमी दर्ज की गई। अप्रैल महीने में यह आंकड़ा 10-15 प्रतिशत था। 36 दिन शहर की हवा येलो जोन में और पांच दिन ऑरेंज जोन में रही।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के संयुक्त प्रयास से शहर की हवा की गुणवत्ता के लिए चलाया जा रहा अभियान असरकारी रहा है।
शहर में पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ ही नियमित रूप से स्प्रिंक्लर व मिस्ट गन से छिड़काव का सकारात्मक असर हुआ है। इसके अलावा कच्ची जमीन वाले क्षेत्रों में इंटरलॉकिंग कराई जा रही है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के संयुक्त प्रयास से शहर की हवा की गुणवत्ता के लिए चलाया जा रहा अभियान असरकारी रहा है।
शहर में पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ ही नियमित रूप से स्प्रिंक्लर व मिस्ट गन से छिड़काव का सकारात्मक असर हुआ है। इसके अलावा कच्ची जमीन वाले क्षेत्रों में इंटरलॉकिंग कराई जा रही है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स
जुलाई 2023
- 30 दिन ग्रीन जोन
- 1 दिन येलो जोन
- 26 दिन ग्रीन
- 3 दिन येलो जोन
- 2 दिन रेड जोन
- 28 दिन ग्रीन जोन
- 2 दिन येलो जोन
- 30 दिन ग्रीन जोन
- 1 दिन येलो जोन
- 19 दिन ग्रीन जोन
- 10 दिन येलो
- 1 दिन आरेंज जोन
- 22 दिन ग्रीन जोन
- 8 दिन येलो जोन
- 1 दिन ऑरेंज
- 25 दिन ग्रीन जोन
- 6 दिन येलो जोन
- 24 दिन ग्रीन जोन
- 5 दिन येलो जोन
- 26 दिन ग्रीन जोन
- 5 दिन येलो जोन
- अप्रैल 2024 28 दिन ग्रीन जोन
- मई 2024 25 दिन ग्रीन जोन एक दिन येलो जोन
- जून 2024 29 दिन ग्रीन जोन
- जुलाई 2024 26 दिन ग्रीन जोन
- अगस्त 2024 26 दिन ग्रीन जोन
- सितंबर 2024 25 दिन ग्रीन जोन
ऐसे हुआ बदलाव
- कच्ची जमीन वाले इलाकों में इंटरलॉकिंग
- खुले में निर्माण सामग्री रखने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई
- भवन निर्माण के दौरान मानकों का सख्ती से पालन
- शहर में इलेक्टि्रक और सीएनजी वाहनों की संख्या में इजाफा
- नई बनी सड़कें व फ्लाईओवर चालू होने से हवा की स्थिति सुधरी