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पाबंद करें या शांतिभंग में चालान, रिपोर्ट में कारण स्पष्ट करे पुलिस

Thu, 04 Feb 2021 04:44 PM IST
गीतार्जुन गौतम पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 04 Feb 2021 04:44 PM IST
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Ban or challan in Peacemaking police should explain the reason in the report 
Demo Pic - फोटो : google

लोकशांति और कानून व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस यदि अब किसी को पाबंद करेगी या फिर शांतिभंग के आरोप में चालान करेगी, तो उसे अपनी चालानी रिपोर्ट में तथ्य के साथ कारण भी स्पष्ट करना होगा। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश के बाद प्रदेश के सभी जिलों के एसपी/एसएसपी और रेंज के डीआईजी/आईजी के लिए यह निर्देश प्रदेश डीजीपी एचसी अवस्थी ने जारी किया है।

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दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 और 116 का इस्तेमाल लोकशांति और कानून व्यवस्था का उल्लंघन होने की आशंका के आधार पर पुलिस किसी को पाबंद करने के लिए करती है। वहीं, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत शांतिभंग का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस चालान करती है। इन दोनों कार्रवाई के लिए पुलिस वर्षों पुराने प्रिंटेड प्रोफार्मा में चालानी रिपोर्ट भेजती है। प्रिंटेड प्रोफार्मा में पाबंद किए जाने या शांतिभंग में चालान किए जाने संबंधी पूरा विवरण और कारण नहीं स्पष्ट हो पाता है। इस वजह से निरोधात्मक कार्रवाई की चालानी रिपोर्ट प्रिंटेड प्रोफार्मा में भेजने पर रोक लगाते हुए प्रकरण में विवाद से संबंधित कारण का उल्लेख करने के लिए कहा गया है।
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डीजीपी ने जारी किए हैं ये निर्देश
प्रत्येक प्रकरण में विवाद से संबंधित स्पष्ट और तथ्यात्मक कारण दर्ज किया जाए। 
प्रत्येक चालानी रिपोर्ट के साथ प्रकरण से संबंधित प्रार्थना पत्र या एनसीआर की प्रति जरूर संलग्न की जाए। 
दरोगा जो भी चालानी रिपोर्ट तैयार करें, उसे थानाध्यक्ष देखें और अपनी टिप्पणी कर आगे की कार्रवाई के लिए भेजें।

रोहनिया क्षेत्र के शिव की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश
दीवानी कचहरी के अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि रोहनिया थाना अंतर्गत मिल्कीपुर के शिव कुमार वर्मा और उनके भाई का पुलिस ने शांतिभंग की आशंका में आठ अक्तूबर 2020 को चालान कर दिया था। अपराध जमानतीय होने का तर्क देते हुए एसडीएम राजातालाब से रिहा करने का अनुरोध किया। एसडीएम राजातालाब ने रिहा न करते हुए दोनों भाईयों को 15 दिन तक जेल में रखा। शिव और उनके भाई ने एसडीएम राजातालाब के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस ठोस कारण बताए बिना किसी को पाबंद या शांतिभंग के आरोप में चालान नहीं कर सकेगी।

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